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वाराणसी: फर्जी जमानतदार गिरोह का पर्दाफाश, साइबर अपराधियों को जेल से बाहर निकालने वाले मास्टरमाइंड सहित 2 गिरफ्तार

कचहरी में सक्रिय था संगठित गैंग; फर्जी आधार, पैन कार्ड और थाने की नकली मुहर लगाकर कोर्ट को देते थे चकमा

 

वाराणसी, भदैनी मिरर। उत्तर प्रदेश की धार्मिक राजधानी वाराणसी में साइबर अपराधियों को अवैध तरीके से जमानत दिलाने वाले एक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है। वाराणसी की साइबर थाना पुलिस ने एक ऐसी संगठित गैंग के दो शातिर सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जो फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और सरकारी मुहरों के जरिए न्यायालय को गुमराह कर अपराधियों को जेल से बाहर निकालने का काम कर रहे थे।


मुखबिर की सूचना पर हुई कार्रवाई


एसीपी क्राइम विदुष सक्सेना ने बताया कि एक टीम गठित की गई थी। बीते 8 मई को पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि कुछ लोग साइबर अपराधियों के लिए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमानत लेने की फिराक में हैं।


कचहरी के पास से हुई गिरफ्तारी


साइबर पुलिस की टीम ने 9 मई 
को कचहरी क्षेत्र के पास से दो अभियुक्तों को दबोच लिया। गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान 
बलराम दास (76 वर्ष) निवासी: चमांव, शिवपुर, वाराणसी, जनार्दन सिंह (36 वर्ष) निवासी: चमांव, शिवपुर, वाराणसी के रुप में हुई है। 


मोडस ऑपरेंडी: कैसे देते थे वारदात को अंजाम?


एसीपी क्राइम विदुष सक्सेना के अनुसार, यह गैंग बेहद शातिर तरीके से काम करता था।

एसीपी ने बताया कि आरोपी अपने ही आधार और पैन कार्ड में कूटरचना (Forging) कर नाम और पता बदल देते थे। ये गैंग ग्राम प्रधान के फर्जी लेटर पैड और थानों की नकली मुहरों का इस्तेमाल करते थे। गिरोह खुद ही थाने की फर्जी वेरिफिकेशन रिपोर्ट तैयार करता था और उसे स्पीड पोस्ट के जरिए सीधे न्यायालय भेज देता था, ताकि कोर्ट को लगे कि रिपोर्ट असली है।


जमानत रद्द कराने की तैयारी


पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह पिछले एक साल से वाराणसी में सक्रिय है और पूर्व में भी कई साइबर अपराधियों की जमानत करा चुका है। पुलिस अब उन सभी मामलों की फाइलें दोबारा खोल रही है। अधिकारियों का कहना है कि जिन अपराधियों की जमानत इस फर्जीवाड़े से हुई है, उनके बेल कैंसिलेशन (जमानत निरस्तीकरण) की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

गिरफ्तार करने वाली टीम:

इस सफल कार्रवाई में निरीक्षक योगेन्द्र प्रसाद, विजय नारायण मिश्र, गोपाल जी कुशवाहा, विपिन कुमार सहित उप-निरीक्षक आलोक रंजन सिंह, विवेक सिंह और अन्य आरक्षी शामिल रहे।

पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों और कचहरी के भीतर संदिग्ध भूमिका निभाने वाले लोगों की तलाश में जुट गई है। डिजिटल एविडेंस और सीडीआर के जरिए अन्य आरोपियों को चिन्हित किया जा रहा है।