वाराणसी: DAV PG कॉलेज का कर्मचारी दुर्गेश प्रताप सिंह गुंडा एक्ट में जिलाबदर, आपराधिक रिकॉर्ड के बावजूद नियुक्ति पर उठे सवाल
सीर गोवर्धनपुर निवासी पर लूट और मारपीट के दर्ज हैं कई मुकदमे, पुलिस आयुक्त के आदेश पर डेढ़ माह के लिए कमिश्नरेट की सीमा से बाहर।
वाराणसी (भदैनी मिरर): काशी की धार्मिक और शैक्षणिक छवि को धूमिल करने वाले आपराधिक तत्वों पर पुलिस प्रशासन का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। इसी क्रम में वाराणसी पुलिस आयुक्त ने त्वरित कार्रवाई करते हुए डीएवी पीजी कॉलेज (बीएचयू से सम्बद्ध) में तैनात एक कर्मचारी को गुंडा एक्ट के तहत डेढ़ महीने (1.5 माह) के लिए जिलाबदर कर दिया है।
लगातार आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहने के बावजूद कॉलेज में हुई उसकी नियुक्ति अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है।
लूट, मारपीट और धमकी के दर्ज हैं कई मुकदमे
लंका थाना प्रभारी निरीक्षक राजकुमार शर्मा के अनुसार, आरोपी दुर्गेश प्रताप सिंह पुत्र सत्यप्रकाश सिंह वर्तमान में सीर गोवर्धनपुर क्षेत्र की काशीपुरम् कॉलोनी में रह रहा था। वह मूल रूप से बलिया जिले के बैरिया थाना अंतर्गत तामिलपुर गांव का निवासी है।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, आरोपी दुर्गेश पर वर्ष 2019 से लेकर 2025 तक मारपीट, रंगदारी, लूटपाट और जान से मारने की धमकी देने जैसी संगीन धाराओं में कई मुकदमे दर्ज हैं। वह लगातार क्षेत्र में अशांति और भय का माहौल पैदा कर रहा था। उसके आपराधिक इतिहास को देखते हुए वाराणसी पुलिस कमिश्नर ने उसे तत्काल प्रभाव से डेढ़ माह के लिए वाराणसी कमिश्नरेट की सीमाओं से बाहर (जिलाबदर) रहने का सख्त आदेश जारी किया है।
मल्टी टास्किंग स्टाफ (MTS) पद पर नियुक्ति पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरी कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल शैक्षणिक संस्थान की व्यवस्था पर उठ रहा है। एक तरफ जहाँ आरोपी का 2019 से आपराधिक इतिहास रहा है, वहीं दूसरी तरफ वह बीएचयू से सम्बद्ध प्रतिष्ठित डीएवी पीजी कॉलेज में बतौर मल्टी टास्किंग स्टाफ (MTS) नौकरी हासिल करने में कामयाब रहा।
आरोपी के जिलाबदर होते ही अब कॉलेज प्रबंधन और भर्ती प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है:
-
क्या नौकरी पर रखने से पहले आरोपी का पुलिस वेरिफिकेशन (Police Verification) कराया गया था?
-
संगीन मुकदमों के बावजूद उसे कॉलेज में किस आधार पर नियुक्त किया गया?
जिलाबदर की कार्रवाई के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि उसकी एमटीएस पद पर हुई नियुक्ति की भी उच्च स्तरीय जांच की जाएगी। दोषी पाए जाने पर संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है।