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वाराणसी कोर्ट का बड़ा फैसला: पत्नी की हत्या करने वाले पति को उम्रकैद, लगा भारी जुर्माना

वाराणसी: पत्नी की हत्या कर आंगन में लाश गाड़ने वाले पति को उम्रकैद

 

भदैनी मिरर, वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले से एक झकझोर देने वाले मामले में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। लोहता थाना क्षेत्र में अपनी ही पत्नी की बेरहमी से हत्या कर शव को घर के आंगन में गाड़ने वाले आरोपी पति को कोर्ट ने दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास (सश्रम) की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (चौदहवाँ) अतुल चौधरी की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी पर कुल 70 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

धूप सेंकने का बहाना और आंगन में दफन लाश: यह था पूरा मामला

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, यह खौफनाक वारदात 28 दिसंबर 2020 की है। मामले की रिपोर्ट मृतका के बड़े बेटे रामविलास हरिजन ने दर्ज कराई थी। रामविलास और उसका छोटा भाई अमर जब काम से घर लौटे, तो मां आशा देवी गायब थीं। पिता राजेंद्र प्रसाद ने बेटों से झूठ बोला कि मां सुनार की दुकान पर गई हैं।

शाम को जब बेटों ने देखा कि पिता राजेंद्र घर के आंगन में फरसे (कुदाल) से मिट्टी को समतल कर रहे हैं, तो उन्हें शक हुआ। पूछने पर पिता ने बेहद शातिराना अंदाज में कहा कि वह 'धूप सेंकने के लिए जगह बराबर कर रहे हैं'। लेकिन घर के अंदर दीवारों पर खून के छींटे देखकर बेटों का माथा ठनका।

शव गलाने के लिए डाला था नमक, बेटों ने खुद खोदा आंगन

संदेह गहराने पर जब दोनों बेटों ने आंगन की उस संदिग्ध जगह को खोदना शुरू किया, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। मिट्टी के नीचे उनकी मां आशा देवी का शव दबा हुआ था। क्रूरता की हद पार करते हुए आरोपी पति ने शव को जल्दी गलाने के लिए उसके ऊपर भारी मात्रा में नमक भी डाल रखा था। बेटों के सख्त रुख के आगे आरोपी ने घुटने टेक दिए और कबूल किया कि प्रॉपर्टी विवाद के चलते उसने इस वारदात को अंजाम दिया।

अदालत ने दो अलग-अलग धाराओं में सुनाई कड़ी सजा

वारदात के तीन दिन बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इस मामले में ए.डी.जी.सी. (क्रिमिनल) रोहित मौर्य और एडवोकेट सुधांशु गुप्ता ने अभियोजन पक्ष की ओर से दमदार पैरवी की। कोर्ट के सामने कुल 10 गवाहों को पेश किया गया।

साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर माननीय न्यायालय ने आरोपी राजेंद्र प्रसाद को निम्नलिखित सजा सुनाई:

  • धारा 302 IPC (हत्या): उम्रकैद (सश्रम कारावास) और 50,000 रुपये का अर्थदंड। जुर्माना न भरने पर एक साल की अतिरिक्त कैद।

  • धारा 201 IPC (साक्ष्य मिटाना): 3 वर्ष की जेल और 20,000 रुपये का अर्थदंड। जुर्माना न देने पर चार महीने की अतिरिक्त जेल।

न्यायाधीश अतुल चौधरी ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि समाज में ऐसे जघन्य अपराधों के लिए कोई जगह नहीं है और अपराधियों में कानून का खौफ पैदा करने के लिए ऐसी कड़ी सजा बेहद जरूरी है।