वाराणसी में फर्जी कॉल सेंटर से ठगी करने वाले 26 साइबर अपराधियों को कोर्ट से जमानत
सिगरा व लक्सा क्षेत्र में हुई थी पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 54 मोबाइल-लैपटॉप समेत भारी मात्रा में दस्तावेज हुए थे बरामद
Aug 30, 2025, 19:07 IST
वाराणसी, भदैनी मिरर। फर्जी कॉल सेंटर चलाकर ठगी करने वाले 26 साइबर आरोपियों को वाराणसी की अदालत से राहत मिल गई है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार की अदालत ने सभी आरोपियों को 25-25 हजार रुपए की दो जमानतें और बंधपत्र देने पर रिहाई का आदेश दिया।
जिन आरोपियों को जमानत मिली है उनमें किशन झा, शुभम राय, नीतीश कुमार राय, पवन कुमार पाण्डेय, शुभम जायसवाल, ज्ञानेंद्र राय, सूर्यांश गुप्ता, चंदन पाण्डेय समेत कुल 26 आरोपी शामिल हैं। अदालत में बचाव पक्ष की पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, बृजपाल सिंह यादव गुड्डू, नरेश यादव और संदीप यादव ने की।
कैसे हुआ था खुलासा?
डीसीपी क्राइम सरवणन टी को सूचना मिली थी कि सिगरा और लक्सा थाना क्षेत्र में कुछ शातिर साइबर अपराधी शेयर मार्केट में ट्रेडिंग और इंवेस्टमेंट के नाम पर ठगी कर रहे हैं। आरोपियों पर यह भी आरोप था कि वे लोगों को ऑनलाइन इंवेस्टमेंट के गलत टिप्स और फर्जी वीडियो भेजते थे। इसके बाद क्यूआर कोड और ऑनलाइन पेमेंट के जरिए पीड़ितों से पैसे ऐंठते थे।
इन साइबर अपराधियों का गिरोह “एंजल कंपनी” में डीमैट अकाउंट खुलवाने के नाम पर भी लोगों को फंसाता था।
पुलिस की छापेमारी और गिरफ्तारी
सूचना के आधार पर साइबर सेल, सिगरा और लक्सा थाने की संयुक्त पुलिस टीम ने छापेमारी की। छापेमारी के दौरान कुल 26 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उनके पास से 54 मोबाइल फोन, कई लैपटॉप, चेकबुक, एटीएम कार्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए।
दो साल से चल रहा था फ्रॉड कॉल सेंटर
जांच में खुलासा हुआ कि यह फर्जी कॉल सेंटर करीब दो साल से वाराणसी में सक्रिय था। एनसीआरबी पोर्टल पर इस गैंग से जुड़े 57 से अधिक केस दर्ज थे। गिरोह मुख्य रूप से दक्षिण भारत (तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक) और पश्चिम भारत (गुजरात, महाराष्ट्र) के लोगों को निशाना बनाता था।
कोर्ट से जमानत मिलने के बाद एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या इस साइबर गैंग की गतिविधियां यहीं थम जाएंगी या पुलिस को इनके नेटवर्क की गहनता से पड़ताल करनी होगी।