Varanasi: फर्जी तरीके से फ्लैट बेचने वाला बिल्डर धनंजय कुमार गिरफ्तार, कोर्ट ने किया रिमांड मंजूर, भेजा गया जेल
दुर्गाकुंड से दबोचा गया बिल्डर; अन्य आरोपियों की तलाश जारी
वाराणसी (भदैनी मिरर)। वाराणसी कमिश्नरेट के चितईपुर पुलिस को जमीन धोखाधड़ी और फर्जीवाड़ा के मामले में एक बड़ी सफलता हाथ लगी है. पुलिस टीम ने फर्जी तरीके से फ्लैट विक्रय करने, धोखाधड़ी एवं आपराधिक विश्वासघात के मामले में लंबे समय से फरार चल रहे हेरम्ब होम्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर व बिल्डर धनंजय कुमार को गिरफ्तार कर लिया है.
गिरफ्तारी के बाद आरोपी बिल्डर धनंजय कुमार को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अर्पित कुमार की अदालत में पेश किया गया. जहाँ कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी की 14 दिन की न्यायिक रिमांड मंजूर करते हुए उसे जेल भेज दिया है. इस मामले की अगली सुनवाई अब 11 जून को होगी.
कोर्ट में अभियोजन अधिकारी ने जमानत का किया पुरजोर विरोध
पेशी के दौरान कोर्ट रूम में आरोपी बिल्डर की तरफ से जमानत की अर्जी दाखिल की गई थी. इस पर अभियोजन अधिकारी अंकित सिंह ने कड़ी आपत्ति जताते हुए जमानत का जोरदार विरोध किया. अभियोजन अधिकारी ने अदालत को दलील दी कि यह जनता की गाढ़ी कमाई और पैतृक संपत्ति हड़पने का एक बेहद गंभीर संगठित अपराध है, इसलिए आरोपी को किसी भी कीमत पर राहत नहीं मिलनी चाहिए. अदालत ने अभियोजन पक्ष के तर्कों से सहमत होकर बिल्डर को जेल भेजने का आदेश दिया.
विवेचना के दौरान धारा 406 को 409 में बदला
अभियोजन अधिकारी अंकित सिंह ने बताया कि पीड़ित की शिकायत पर शुरुआत में यह केस भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 406 (क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट), 504 (अपमानित करना) और 506 (जान से मारने की धमकी) के तहत दर्ज किया गया था.
परंतु, विवेचना के दौरान जब पुलिस को बिल्डर द्वारा किए गए बड़े वित्तीय गबन और अमानत में खयानत के पुख्ता सबूत मिले, तो पुलिस ने धारा 406 को हटाकर उसकी जगह धारा 409 (लोक सेवक या बैंक अधिकारी/एजेंट द्वारा आपराधिक विश्वासघात - जिसमें उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है) की बढ़ोतरी कर दी.
क्या था पूरा मामला?
इस पूरे फर्जीवाड़े के शिकार हुए वादी राहुल शुक्ला (पुत्र स्व. माता प्रसाद शुक्ला) वर्तमान में महेश तला, 24 परगना (पश्चिम बंगाल) के रहने वाले हैं. उन्होंने वाराणसी के पुलिस कमिश्नर से न्याय की गुहार लगाई थी.
धोखाधड़ी की पूरी इनसाइड स्टोरी:
1. जमीन और एग्रीमेंट: राहुल शुक्ला के माता-पिता ने साल 1986 में मौजा नेवादा (तहसील सदर, वाराणसी) में 3107.75 वर्ग फीट जमीन खरीदी थी. वे कोलकाता में रहते थे, जिसका फायदा उठाने के लिए मेसर्स हेरम्ब होम्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर संतोष कुमार सिंह और धनंजय कुमार ने उनसे संपर्क किया.
2. 60-40 का झांसा: आरोपियों ने 14 दिसंबर 2017 को 60-40 के रेशियो पर एक बिल्डर एग्रीमेंट पंजीकृत कराया. एग्रीमेंट में तय 15 लाख रुपये में से आरोपियों ने केवल 3 लाख रुपये दिए और बाकी पैसे 6 महीने में देने का वादा किया. साथ ही चालाकी से जमीन की 'पावर ऑफ अटॉर्नी' भी लिखवा ली.
3. पिता की मौत के बाद फर्जीवाड़ा: 30 नवंबर 2018 को राहुल के पिता का देहांत हो गया. पिता की मौत के बाद वह पावर ऑफ अटॉर्नी कानूनी रूप से स्वतः समाप्त हो गई. इसके बावजूद आरोपी धनंजय कुमार और उसकी पत्नी शिल्पा सिंह ने अवैध रूप से जमीन पर निर्माण शुरू कर दिया और बिना वैध कागजात के आम जनता को फ्लैट बेचना शुरू कर दिया.
4. धमकी देकर भगाया: पीड़ित ने जब इसका विरोध किया और बताया कि बिल्डर एग्रीमेंट की अवधि भी 31 दिसंबर 2020 को समाप्त हो चुकी है, तो आरोपियों ने नया एग्रीमेंट करने का लालच देकर उसे टाल दिया. इसके बाद आरोपियों ने पीड़ित को बिना बताए 2022 से 2025 के बीच कई फ्लैट्स बेच दिए. जब पीड़ित राहुल ने कड़ा विरोध किया, तो आरोपियों ने सरेआम धमकी दी कि— "अगर जान प्यारी है तो यहाँ से भाग जाओ, कोई पैसा नहीं मिलेगा और तुम्हारी बाकी जमीन भी कब्जा कर लेंगे."
दुर्गाकुंड स्थित आवास से हुआ गिरफ्तार
पुलिस कमिश्नर वाराणसी के निर्देश पर अपराधियों और वांछितों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत, डीसीपी काशी जोन और एसीपी भेलूपुर के पर्यवेक्षण में चितईपुर थाना प्रभारी ने मुखबिर की सूचना और सर्विलांस की मदद ली.पुलिस टीम ने जाल बिछाकर अभियुक्त धनंजय कुमार (उम्र 38 वर्ष) को उसके निवास स्थान- नवाबगंज, दुर्गाकुण्ड (थाना भेलूपुर, वाराणसी) से बीते शाम करीब 6:30 बजे धर दबोचा. पुलिस अब इस मामले में संतोष कुमार और दंपति धनंजय श्रीवास्तव और शिल्पा सिंह की तलाश है।