Varanasi: वाराणसी में DIG दफ्तर और सरकारी आवास हड़पने की बड़ी साजिश, 6 नामजद सहित कई पर FIR दर्ज
फर्जी वसीयत और कूट रचित दस्तावेजों के जरिए राज्य संपत्ति को निजी नाम पर कराने का खेल, लेखपाल की तहरीर पर कैंट पुलिस की बड़ी कार्रवाई
वाराणसी (भदैनी मिरर): उत्तर प्रदेश के वाराणसी में भू-माफियाओं और जालसाजों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब सरकारी और वीवीआईपी संपत्तियों पर भी नजरें गड़ा दी गई हैं। ताजा मामला मकबूल आलम रोड स्थित पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) रेंज कार्यालय और उनके सरकारी आवास की जमीन से जुड़ा है। इस बेशकीमती सरकारी संपत्ति को कूटरचित (फर्जी) दस्तावेजों के सहारे अपने नाम कराने की एक गंभीर साजिश का भंडाफोड़ हुआ है। मामले में लेखपाल की तहरीर पर कैंट थाने की पुलिस ने 6 नामजद और अन्य अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
नगर निगम को गुमराह कर कराया था नामांतरण
सरकारी अभिलेखों और नगर निगम के असेसमेंट रजिस्टर के अनुसार, संबंधित भूखंड पुलिस उपमहानिरीक्षक कार्यालय एवं सरकारी आवास के रूप में दर्ज है। आरोप है कि पूर्व में चौक के राजा दरवाजा निवासी आनंद अग्रवाल नामक व्यक्ति ने नगर निगम के अधिकारियों को गुमराह कर इस राज्य संपत्ति का नामांतरण (म्युटेशन) अपने नाम करवा लिया था।
अदालत से खारिज हो चुकी है कथित 'फर्जी' वसीयत
9 अक्टूबर 2019 को आनंद अग्रवाल के निधन के बाद इस खेल का दूसरा अध्याय शुरू हुआ। उनके पुत्र गुंजन अग्रवाल ने एक कथित 'अपंजीकृत वसीयत' को आधार बनाकर खुद को इस संपत्ति का वारिस बताया और न्यायालय में प्रतिस्थापन प्रार्थना पत्र दाखिल कर दिया।
इस पर राज्य सरकार की ओर से कड़ी आपत्ति दर्ज कराई गई। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने 18 नवंबर 2022 को अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि इस अपंजीकृत वसीयत का कोई वैध साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिसके बाद गुंजन अग्रवाल का प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया गया था।
खारिज होने के बाद भी दोबारा रची गई साजिश
लेखपाल द्वारा दी गई तहरीर के अनुसार, कोर्ट से प्रार्थना पत्र निरस्त होने के बावजूद आरोपियों ने हार नहीं मानी। गुंजन अग्रवाल और उसके सहयोगियों ने उसी कथित फर्जी वसीयत और हेरफेर किए गए दस्तावेजों के सहारे दोबारा सरकारी संपत्ति पर अपना अधिकार स्थापित करने और नामांतरण कराने का सुनियोजित प्रयास किया। सरकारी अभिलेखों में हेराफेरी कर राज्य की करोड़ों की संपत्ति को हड़पने की यह एक बड़ी साजिश थी।
इन आरोपियों पर कैंट थाने में दर्ज हुआ केस
लेखपाल की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कैंट पुलिस ने मुख्य आरोपी गुंजन अग्रवाल के साथ-साथ इस साजिश में उसका साथ देने वाले सहयोगियों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया है। नामजद आरोपियों में शामिल हैं:
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गुंजन अग्रवाल (निवासी: राजा दरवाजा, चौक)
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स्मृता गोयल (निवासी: मवैया, सारनाथ)
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इला अग्रवाल (निवासी: मवैया, सारनाथ)
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बृजेश अग्रवाल (निवासी: मवैया, सारनाथ)
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शरद अग्रवाल (निवासी: मवैया, सारनाथ)
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मयंक अग्रवाल
पुलिस प्रशासन का कहना है कि सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्जा या हेरफेर करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया जाएगा और इस मामले के दोषियों को जल्द सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।