वाराणसी : गंगा में बिरयानी के अवशेष फेंकने का मामला, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 8 आरोपियों को दी जमानत
नाव पर रोजा इफ्तार के दौरान गंगा प्रदूषित करने का आरोप, एफिडेविट में माफी मांगने पर कोर्ट से मिली राहत, 6 की जमानत अब भी बाकी।
May 15, 2026, 13:48 IST
प्रयागराज/वाराणसी। वाराणसी के प्रसिद्ध गंगा घाट पर नाव पर रोजा इफ्तार करने और इस दौरान बिरयानी के अवशेष पवित्र गंगा नदी में फेंकने के चर्चित मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी खबर सामने आई है। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए, लेकिन आरोपियों द्वारा लिखित में माफी मांगे जाने के बाद 8 आरोपियों की सशर्त जमानत मंजूर कर ली है।
गौरतलब है कि पवित्र नदी को प्रदूषित करने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इस मामले में कुल 14 लोगों के खिलाफ वाराणसी पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। जिसमें से 8 को राहत मिल गई है, जबकि 6 आरोपी अभी भी जमानत का इंतजार कर रहे हैं।
दो अलग-अलग बेंच ने सुनाया फैसला
इस संवेदनशील मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की दो अलग-अलग सिंगल बेंचों में सुनवाई हुई।
जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला की सिंगल बेंच: कोर्ट ने इस बेंच के समक्ष दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए 5 आरोपियों की जमानत अर्जी को हरी झंडी दी। राहत पाने वालों में मोहम्मद आजाद अली, मोहम्मद तहसीम, निहाल अफरीदी, मोहम्मद तौसीफ और मोहम्मद अनस शामिल हैं।
जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की सिंगल बेंच: इस दूसरी सिंगल बेंच ने मामले के 3 अन्य आरोपियों मोहम्मद समीर, मोहम्मद अहमद रजा और मोहम्मद फैजान की अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश जारी किया।
माफीनामे के बाद कोर्ट ने दी राहत
सुनवाई के दौरान आरोपियों की तरफ से कोर्ट में एक एफिडेविट (हलफनामा) दाखिल किया गया। इस एफिडेविट में सभी आरोपियों ने गंगा नदी में अपशिष्ट फेंकने की अपनी भूल को स्वीकार करते हुए बिना शर्त सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। कोर्ट ने आरोपियों के इस पछतावे और माफीनामे को आधार मानते हुए उन्हें जमानत की राहत प्रदान की।
क्या था पूरा मामला?
यह पूरा विवाद वाराणसी के गंगा घाट का है, जहां एक चलती नाव पर कुछ युवकों द्वारा रोजा इफ्तार पार्टी का आयोजन किया गया था। इफ्तार के बाद बचे हुए भोजन और बिरयानी के अवशेषों को सीधे गंगा नदी में प्रवाहित कर दिया गया था, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों और संगठनों में भारी आक्रोश देखा गया था।
धार्मिक नगरी काशी की अस्मिता और गंगा की स्वच्छता से जुड़े इस संवेदनशील मामले पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने कुल 14 नामजद लोगों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत किया था। फिलहाल कोर्ट के इस रुख के बाद 8 लोग जेल से बाहर आ सकेंगे, वहीं शेष 6 आरोपियों की कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है।