Varanasi: अधिवक्ताओं का डीएम पोर्टिको पर जोरदार प्रदर्शन, लेखपाल को निलंबित करने की मांग, FIR दर्ज होने से खफा है वकील
तहसील सदर में मारपीट प्रकरण को लेकर अधिवक्ताओं ने भ्रष्टाचार, झूठे मुकदमे और पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल
Updated: Sep 1, 2025, 17:50 IST
वाराणसी, भदैनी मिरर। तहसील सदर में अधिवक्ता और लेखपाल के बीच मारपीट का मामला अब बड़े विवाद का रूप ले चुका है। अधिवक्ताओं के खिलाफ शिवपुर थाने में मुकदमा दर्ज किए जाने से नाराज वकीलों ने सोमवार की सुबह डीएम पोर्टिको पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान अधिवक्ताओं ने अपनी मांग को लेकर एडिशनल सीपी राजेश कुमार से मुलाकात कर अपनी मांग रखी।
सोमवार को दी सेन्ट्रल बार एसोसिएशन 'बनारस' वाराणसी और दी बनारस बार एसोसिएशन की आम सभा आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय बार एसोसिएशन अध्यक्ष मंगलेश कुमार दुबे एडवोकेट ने की, जबकि संचालन महामंत्री शशांक कुमार श्रीवास्तव ने किया। इस दौरान सतीश तिवारी एडवोकेट (अध्यक्ष, बनारस बार एसोसिएशन) और राजेश कुमार गुप्ता एडवोकेट (महामंत्री, केंद्रीय बार एसोसिएशन) सहित कई वरिष्ठ अधिवक्ता मौजूद रहे।
सभा में अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि तहसील सदर में व्याप्त भ्रष्टाचार की शिकायतों के बावजूद जिलाधिकारी द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। यही कारण है कि लेखपालों का मनोबल बढ़ा हुआ है और वे अधिवक्ताओं व वादकारियों के साथ अमानवीय व्यवहार कर रहे हैं।
पीड़ित अधिवक्ता राजनाथ यादव ने आरोप लगाया कि लेखपाल कुंदन सिंह और उनके साथियों ने तहसील परिसर में उन्हें लाठियों से दौड़ाकर पीटा। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुआ। अधिवक्ताओं ने मांग की कि दोषी लेखपालों को बर्खास्त कर उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे में गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए। सभा में यह भी प्रस्ताव पारित किया गया कि थाना शिवपुर के प्रभारी निरीक्षक ने बिना जांच के अधिवक्ताओं के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज किया है।
अधिवक्ताओं ने थानाध्यक्ष शिवपुर की भूमिका संदिग्ध बताते हुए उनके तत्काल निलंबन और विभागीय जांच की मांग की।
उल्लेखनीय है कि बीते 28 अगस्त को तहसील सदर में धारा 34 के नामांतरण रिपोर्ट को लेकर अधिवक्ता और लेखपालों के बीच विवाद हुआ था। अधिवक्ताओं का आरोप है कि नामांतरण रिपोर्ट के लिए रिश्वत मांगी गई और विरोध करने पर उन्हें मारपीट का शिकार होना पड़ा। पुलिस ने पहले अधिवक्ताओं के तहरीर पर लेखपाल और राजस्वकर्मियों के खिलाफ केस रजिस्टर्ड किया था। लेकिन बाद में लेखपाल की तहरीर पर अधिवक्ताओं पर भी केस दर्ज कर लिया गया है।