वाराणसी: घर में पेंटिंग करने आए युवक ने उड़ाया सिम कार्ड, फिर साथी संग मिलकर बुजुर्ग के खाते से साफ किए ₹12 लाख; 2 गिरफ्तार
घर में पेंटिंग करने आए युवक ने उड़ाया सिम कार्ड, फिर साथी संग मिलकर बुजुर्ग के खाते से साफ किए ₹12 लाख; 2 शातिर गिरफ्तार
वाराणसी / भदैनी मिरर ब्यूरो: पुलिस कमिश्नरेट वाराणसी की साइबर क्राइम थाना पुलिस ने बुजुर्ग के बैंक खाते से ₹12 लाख की अवैध निकासी करने वाले एक बेहद शातिर अंतर्जनपदीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो बंदे के घर में काम करने के बहाने घुसते थे और फिर मोबाइल व दस्तावेजों की चोरी कर 'सिम स्वैप' और यूपीआई के जरिए पूरा खाता साफ कर देते थे।
पकड़े गए अभियुक्तों के पास से घटना में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन, ₹70,000 नकद और चार फर्जी कूट रचित (डुप्लीकेट) आधार कार्ड बरामद हुए हैं। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए फ्रॉड से जुड़े खातों में ₹8 लाख होल्ड भी करा दिए हैं।
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पेंटिंग के बहाने घर में एंट्री, फिर ऐसे रचा पूरा खेल
एसीपी साइबर अपराध विदुष सक्सेना ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि घटना की कड़ियां एक महीना पहले से जुड़ी हुई हैं।
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चुपके से चुराया सिम: गिरफ्तार आरोपी विनय कुमार (निवासी बलिया) पेशे से पेंटर है। वह करीब एक महीने पहले पीड़ित शिवदत्त हरिजन (बुजुर्ग सेवानिवृत्त कर्मी, निवासी बलिया, वर्तमान पता- इंजीनियर हाल पुलिस लाइन वाराणसी) के घर पेंटिंग का काम करने गया था।
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दस्तावेजों की फोटोकॉपी: काम के दौरान विनय ने बड़ी चालाकी से बुजुर्ग के मोबाइल से उनका सिम कार्ड निकाल लिया। साथ ही घर में रखे उनके आधार कार्ड और पैन कार्ड की तस्वीरें खींचकर उसकी डुप्लीकेट कॉपियां तैयार कर लीं।
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यूपीआई ऐप किए एक्टिव: विनय ने यह सिम कार्ड और दस्तावेज अपने साथी सुरेंद्र कुमार (निवासी मोहम्मदाबाद, गाजीपुर) को सौंप दिए। दोनों ने एक नए मोबाइल में सिम कार्ड डालकर पीड़ित के नाम पर Paytm, PhonePe और G-Pay जैसे यूपीआई अकाउंट एक्टिवेट कर लिए। चूंकि सिम और केवाईसी के दस्तावेज इनके पास थे, इसलिए इन्हें कोई दिक्कत नहीं हुई।
जनसेवा केंद्रों (CSP) से एक महीने में निकाले ₹12 लाख
आरोपियों ने पिछले एक महीने के दौरान पैरेलल तरीके से अलग-अलग जनसेवा केंद्रों और सीएसपी काउंटरों पर जाकर फर्जी पहचान पत्रों के सहारे किस्तों में कुल ₹12 लाख की निकासी कर ली।
बीती 24 मई 2026 को जब पीड़ित शिवदत्त हरिजन को उनके खाते से रकम गायब होने की भनक लगी, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने तुरंत साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल के निर्देश और डीसीपी अपराध के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने सर्विलांस की मदद से 27 मई को वाराणसी से दोनों आरोपियों को दबोच लिया।
पहले भी जेल जा चुके हैं दोनों आरोपी, खंगाला जा रहा इतिहास
विदुष सक्सेना (एसीपी साइबर क्राइम, वाराणसी) की बाइट के मुख्य अंश: "एसएचओ साइबर क्राइम और उनकी टीम ने बेहतरीन कार्रवाई की है। पकड़े गए दोनों अभियुक्तों (सुरेंद्र और विनय) का पुराना आपराधिक इतिहास है। ये दोनों पहले भी मोबाइल टावर लगाने के नाम पर फर्जीवाड़ा करने और एक फर्जी चेक के मामले में संलिप्त रहे हैं, जिसके आरोप में ये जेल की हवा भी खा चुके हैं। इनके पास से तीन फोन (जिसमें दो कीपैड फोन हैं) और 4 फर्जी आधार कार्ड मिले हैं। ठगी की गई राशि में से ₹8 लाख को हमने संबंधित बैंक खातों में फ्रीज (होल्ड) करवा दिया है।"
साइबर पुलिस की जनता से अपील
इस बड़े खुलासे के बाद वाराणसी साइबर क्राइम टीम ने आम नागरिकों से अपील की है कि:
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अपने घर में काम करने वाले बाहरी लोगों (पेंटर, प्लंबर, कारपेंटर आदि) पर हमेशा नजर रखें।
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अपने मोबाइल, सिम कार्ड और महत्वपूर्ण दस्तावेज (आधार, पैन, पासबुक) कभी भी खुले में न छोड़ें।
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किसी भी अनजान कॉल, लिंक या सिम अपग्रेडेशन के संदेशों पर विश्वास न करें और अपनी बैंकिंग गोपनीय जानकारी किसी से साझा न करें।