Job Fraud: बेरोजगारों से सावधान! रोजगार मेले के डेटा से 'फर्जी कॉल सेंटर' चलाकर ठगने वाले गिरोह का पर्दाफाश, युवती समेत 3 दबोचे गए
Varanasi Job Fraud: रोजगार मेले के डेटा से युवाओं को ठगने वाले 'फर्जी कॉल सेंटर' का भंडाफोड़, युवती सहित 3 शातिर गिरफ्तार
वाराणसी (भदैनी मिरर डेस्क): उत्तर प्रदेश के बेरोजगार युवाओं और युवतियों को नौकरी का झांसा देकर उनके सपनों और पैसों के साथ खिलवाड़ करने वाले एक बड़े संगठित साइबर ठग गिरोह का वाराणसी में पर्दाफाश हुआ है। साइबर क्राइम सेल और थाना रोहनिया पुलिस की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर एक फर्जी मिनी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करते हुए एक युवती सहित तीन शातिर ठगों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है।
यह गिरोह विभिन्न राज्यों के रोजगार मेलों से युवाओं का डेटा चुराकर उन्हें प्रतिष्ठित कंपनियों में नौकरी दिलाने के नाम पर जाल में फंसाता था। पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट वाराणसी के निर्देशन में अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत यह कामयाबी मिली है।
प्रतिबिंब और एनसीआरपी पोर्टल की कड़ियों से खुली गिरोह की पोल
इस बड़े खुलासे की शुरुआत साइबर क्राइम सेल द्वारा 'प्रतिबिंब पोर्टल' और 'एनसीआरपी पोर्टल' (NCRP Portal) पर दर्ज शिकायतों के बारीक विश्लेषण से हुई। जांच के दौरान पुलिस ने उन संदिग्ध मोबाइल नंबरों को चिन्हित किया, जिनके माध्यम से देश के अलग-अलग राज्यों के बेरोजगार युवक-युवतियों से नौकरी का झांसा देकर ऑनलाइन ट्रांजैक्शन कराए जा रहे थे।
तकनीकी साक्ष्यों और सटीक मुखबिरी के आधार पर प्रभारी साइबर सेल इंस्पेक्टर मनोज तिवारी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने रोहनिया क्षेत्र स्थित एक संदिग्ध कार्यालय पर अचानक छापेमारी की। मौके से पुलिस ने दो अभियुक्तों कृष्ण कुमार और रोशनी प्रजापति को रंगेहाथों दबोच लिया। इसके बाद दोनों की निशानदेही पर जगतपुर क्षेत्र से गिरोह के तीसरे मुख्य साथी आशुतोष सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
ठगी का तरीका: कूट रचित दस्तावेजों से लेकर फर्जी ट्रेनिंग का मायाजाल
पुलिस पूछताछ में इस गिरोह के काम करने के बेहद शातिर और संगठित तरीके (Modus Operandi) का खुलासा हुआ है:
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डेटा कलेक्शन: ये ठग अलग-अलग राज्यों और जिलों में लगने वाले सरकारी व निजी रोजगार मेलों से नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों का नाम, मोबाइल नंबर और बायोडाटा एकत्रित कर लेते थे।
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फर्जी ऑफर लेटर: इसके बाद गिरोह की महिला कॉलर अभ्यर्थियों से संपर्क कर बड़ी और नामी कंपनियों में उनका चयन होने की झूठी बात कहती थी। विश्वास जीतने के लिए बकायदा फर्जी और कूट रचित चयन पत्र (Offer Letter), प्रशिक्षण पत्र और ज्वाइनिंग से जुड़े दस्तावेज भेजे जाते थे।
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पैसों की अवैध वसूली: एक बार अभ्यर्थी जब झांसे में आ जाता था, तो उससे रजिस्ट्रेशन फीस, पुलिस वेरिफिकेशन शुल्क, ट्रेनिंग फीस, यूनिफॉर्म चार्ज और रहने-खाने के खर्च के नाम पर अलग-अलग किश्तों में क्यूआर कोड के जरिए मोटी रकम वसूल ली जाती थी।
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वाराणसी बुलाकर गुमराह करना: पैसे ऐंठने के बाद यह गिरोह अभ्यर्थियों को फर्जी ट्रेनिंग के नाम पर वाराणसी बुलाता था और महीनों तक गुमराह करके रखता था।
कूटरचित दस्तावेज और 9 मोबाइल फोन बरामद
पुलिस ने रोहनिया स्थित फर्जी दफ्तर और आरोपियों के पास से भारी मात्रा में डिजिटल और कागजी साक्ष्य बरामद किए हैं, जो इनके संगठित अपराध की गवाही दे रहे हैं।
बरामदगी की सूची:
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इलेक्ट्रॉनिक उपकरण: 09 अदद मोबाइल फोन (सिम कार्ड सहित), 03 अदद डिजिटल क्यूआर कोड (QR Codes) और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य।
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दस्तावेज: 02 अदद कूट रचित (फर्जी) आधार कार्ड।
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अभिलेख: विभिन्न कंपनियों के फर्जी चयन, प्रशिक्षण व ज्वाइनिंग से संबंधित दस्तावेज, पीड़ितों के आवेदन पत्र, अभ्यर्थियों के पहचान पत्रों की प्रतियां, आई-कार्ड और बैंकिंग लेन-देन से जुड़े वित्तीय दस्तावेज।
गिरफ्तार अभियुक्तों का विवरण और विधिक कार्रवाई
पकड़े गए आरोपियों की पहचान निम्नलिखित रूप में हुई है:
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कृष्ण कुमार: पुत्र बन्धु कुमार, निवासी- जनपद बलिया, उत्तर प्रदेश।
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रोशनी प्रजापति: पुत्री सुरेश प्रजापति, निवासी- जनपद वाराणसी (यह मुख्य रूप से टेलीकॉलिंग का काम संभालती थी)।
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आशुतोष सिंह: पुत्र स्व. जितेन्द्र प्रताप सिंह, निवासी- संत रविदास नगर (भदोही)।
थाना रोहनिया पुलिस ने तीनों अभियुक्तों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 319(2), 336(3), 338, 340(2), 61(2) के तहत गंभीर धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर जेल भेजने की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस अब इनके बैंक खातों और बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की गहन वित्तीय व तकनीकी जांच कर रही है ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी की कुल रकम का पता लगाया जा सके।