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वाराणसी में फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश! भेलूपुर में साइबर पुलिस की रेड, 32 हिरासत में, विदेशियों को भी बनाते थे शिकार

ऑनलाइन ट्रेडिंग, निवेश और फर्जी एप्पल/कस्टमर सपोर्ट के नाम पर देश-विदेश (अमेरिका) के लोगों से करते थे फ्रॉड।
 

 

 ट्रेडर बनकर पहुंची साइबर टीम ने कंप्यूटर, लैपटॉप और डिजिटल डेटा कब्जे में लिया
 

भदैनी मिरर डेस्क। वाराणसी के भेलूपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत महमूरगंज स्थित शाही टावर में चल रहे एक हाईटेक फर्जी कॉल सेंटर का साइबर क्राइम टीम और स्थानीय पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। गुरुवार रात हुई इस अचानक छापेमारी से इलाके में हड़कंप मच गया। पुलिस ने मौके से करीब 21-22 युवतियों और 11 युवकों को हिरासत में लिया है।

यह फर्जी कॉल सेंटर ऑनलाइन ट्रेडिंग, भारी मुनाफे का लालच देकर निवेश और डिजिटल मार्केटिंग के नाम पर देश के साथ-साथ विदेशी नागरिकों को भी अपना शिकार बना रहा था।


ट्रेडर बनकर पहुंची साइबर पुलिस, रंगे हाथ पकड़े गए जालसाज


गुप्त सूचना के आधार पर साइबर पुलिस की टीम ने फर्जी कॉल सेंटर के ठिकाने पर छापेमारी के लिए विशेष रणनीति बनाई। साइबर पुलिस के अधिकारी खुद 'ट्रेडर' बनकर इस ठिकाने पर पहुंचे और पूरे परिसर की घेराबंदी कर रेड मारी।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने देखा कि करीब 30 से अधिक युवक-युवतियां फोन कॉल और कंप्यूटर पर व्यस्त थे। पुलिस ने तुरंत पूरी लैब को सील कर वहां मौजूद सभी कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन और महत्वपूर्ण डिजिटल दस्तावेजों को अपने कब्जे में ले लिया।


फर्जी एप्पल और कस्टमर सपोर्ट के जरिए अमेरिकी नागरिकों को भी ठगा

पुलिस पूछताछ और शुरुआती जांच में इस अंतरराष्ट्रीय ठगी गिरोह के काम करने के तरीके का बड़ा खुलासा हुआ है:

  • मल्टीनेशनल एजेंट का नाटक: कॉल सेंटर में तैनात कर्मचारी खुद को किसी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी का अधिकृत एजेंट बताते थे।
  • फर्जी सर्टिफिकेट से भरोसा: लोगों को जाल में फंसाने और भरोसा जीतने के लिए फर्जी प्रमाण पत्र व फर्जी वित्तीय दस्तावेज दिखाए जाते थे।
  • अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क: गिरोह न केवल भारतीय नागरिकों को, बल्कि अमेरिका जैसे देशों के नागरिकों को भी निशाना बना रहा था। इसके लिए वे फर्जी एप्पल केयर और कस्टमर सपोर्ट एग्जीक्यूटिव बनकर कॉल करते थे।


कब से सक्रिय था गिरोह? पुलिस कर रही जांच


एसीपी भेलूपुर और थाना इंस्पेक्टर के अनुसार, बरामद डिजिटल डेटा और कंप्यूटर फाइलों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह फर्जी कॉल सेंटर महमूरगंज में कब से संचालित हो रहा था और अब तक कितने भारतीय व विदेशी नागरिकों से करोड़ों रुपये की ठगी की जा चुकी है।

गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।