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मणिकर्णिका घाट पर जानलेवा हमला करने के मामले में आठ आरोपितों को मिली जमानत, 50-50 हजार के बंधपत्र पर रिहा करने का आदेश

जिला जज संजीव शुक्ला की अदालत ने खारिज की अभियोजन की दलीलें, बचाव पक्ष के अधिवक्ता अनुज यादव ने रखी अर्जी

 

भदैनी मिरर,वाराणसी। काशी के चर्चित मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार के दौरान एक युवक पर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला करने के मामले में अदालत ने आठ आरोपितों को बड़ी राहत दी है। जिला जज संजीव शुक्ला की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए सभी आठों आरोपितों को 50-50 हजार रुपये की दो जमानतें और समान राशि का व्यक्तिगत बंधपत्र प्रस्तुत करने पर रिहा करने का आदेश जारी किया है। अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव ने पैरवी की।

इन आरोपितों को मिली कोर्ट से राहत

अदालत से जमानत पाने वालों में मीरघाट (दशाश्वमेध) निवासी शिवम चौधरी, शनि चौधरी, संदीप चौधरी उर्फ गोलू, अनिल चौधरी, यश चौधरी और वीरभद्र उर्फ बेलभद्र शामिल हैं। इसके अलावा खानपुर (गाजीपुर) निवासी रविशंकर चौधरी तथा जंसा (वाराणसी) निवासी बादल चौधरी को भी जमानत दे दी गई है।

मामूली विवाद में बोला था जानलेवा धावा

अभियोजन पक्ष के अनुसार, रामगढ़ (चंदौली) निवासी वादी मुकदमा रमेश सिंह ने 10 अक्टूबर 2026 को चौक थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि 9 अक्टूबर 2026 को वह अपने स्वर्गीय बहनोई बंशनारायण सिंह के अंतिम संस्कार में शामिल होने मणिकर्णिका घाट आए थे। इसी दौरान उनके भांजे अभिषेक सिंह (निवासी गोपपुर, चोलापुर) का घाट पर मौजूद कुछ स्थानीय लोगों से किसी बात को लेकर मामूली विवाद हो गया।

विवाद इतना बढ़ गया कि मनबढ़ों ने अभिषेक को जान से मारने की धमकी देते हुए लाठी-डंडों से पीट-पीटकर अधमरा कर दिया।

बीएचयू ट्रामा सेंटर में चल रहा था इलाज

हमले में गंभीर रूप से घायल अभिषेक मौके पर ही बेहोश हो गया था, जिसे आनन-फानन में इलाज के लिए बीएचयू ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहाँ उसकी हालत काफी नाजुक बनी हुई थी। घटना के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए थे। वादी की तहरीर पर चौक थाना पुलिस ने नामजद व अन्य आरोपितों के खिलाफ जानलेवा हमले का मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जहाँ से अब कोर्ट ने उन्हें जमानत पर रिहा करने का हुक्म दिया है।