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Court Verdict: 18 साल पुराने मामले में अदालत का फैसला, गैर इरादतन हत्या में तीन सगे भाइयों समेत 4 को 7-7 साल की कैद

चकरोड विवाद में की थी मारपीट, इलाज के दौरान हुई थी मौत

 

वाराणसी, भदैनी मिरर ब्यूरो: वाराणसी की एक अदालत ने 18 वर्ष पुराने गैर इरादतन हत्या के मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया है। अपर जिला जज (पंचम) यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत ने तीन सगे भाइयों सहित चार आरोपियों को दोषी करार देते हुए सात-सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने सभी चारों दोषियों पर 13-13 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न भरने पर दोषियों को अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

चकरोड को लेकर चल रहा था पुराना विवाद

यह पूरा मामला वाराणसी के चौबेपुर थाना क्षेत्र के बरियासनपुर गांव का है। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे डीजीसी (DGC) मुनीब सिंह चौहान ने अदालत को बताया कि बरियासनपुर निवासी वादी अजय कुमार मौर्य और उनके पट्टीदारों के बीच चकरोड के विवाद को लेकर लंबे समय से रंजिश चली आ रही थी।

इसी पुरानी रंजिश को लेकर 25 मई 2008 को पट्टीदार लाठी, हॉकी और लोहे की रॉड से लैस होकर वादी के घर पर चढ़ आए।

घर पर चढ़कर किया था हमला, इलाज के दौरान हुई थी मौत

अभियोजन के अनुसार, घटना के दिन आरोपी प्रदीप, दिलीप, सुनील और राजकुमार उर्फ पप्पू गाली-गलौज करते हुए वादी के पिता रामचरन को जान से मारने की धमकी देने लगे।

  • बुजुर्ग पर किया हमला: जब रामचरन ने इस बात का विरोध किया, तो आरोपियों ने उन पर लाठी और लोहे की रॉड से ताबड़तोड़ हमला कर दिया।

  • परिजनों को भी पीटा: बीच-बचाव करने आए परिवार के अन्य सदस्यों को भी आरोपियों ने बुरी तरह पीटकर घायल कर दिया था।

  • उपचार के दौरान मौत: हमले में गंभीर रूप से घायल बुजुर्ग रामचरन को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया था। इस मामले में मृतक के बेटे अजय कुमार मौर्य ने 26 मई 2008 को चौबेपुर थाने में एफआईआर (FIR) दर्ज कराई थी।

18 साल बाद मिला इंसाफ

चौबेपुर पुलिस ने इस मामले की गहन विवेचना के बाद चारों आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों और पुख्ता चिकित्सीय साक्ष्यों को अदालत के सामने पेश किया।

अदालत का फैसला: अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और पत्रावली पर उपलब्ध वैज्ञानिक व चश्मदीद साक्ष्यों पर विचार करने के बाद पाया कि आरोपियों का कृत्य गैर इरादतन हत्या की श्रेणी में आता है। अदालत ने तीनों सगे भाइयों (प्रदीप, दिलीप, सुनील) और उनके साथी राजकुमार उर्फ पप्पू को दोषी पाते हुए जेल भेज दिया। इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली है।