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संभलकर! मैट्रिमोनियल साइट पर 'विदेशी बिजनेसमैन' बन महिलाओं को ठगने वाले 'बॉस गैंग' का भंडाफोड़, बीटेक छात्र और चायवाला गिरफ्तार


 

दुबई से जुड़े तार, कीमती पार्सल भेजने और फर्जी कस्टम अधिकारी बनकर करते थे ठगी 

 

वाराणसी (भदैनी मिरर डेस्क): डिजिटल दुनिया में जीवनसाथी तलाश रही महिलाओं को अपने जाल में फंसाकर लाखों की चपत लगाने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह का वाराणसी साइबर थाना पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। यह शातिर गिरोह मैट्रिमोनियल वेबसाइट्स पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर खुद को विदेशों (जैसे यूके) का बड़ा बिजनेसमैन बताता था और फिर कीमती गिफ्ट भेजने व कस्टम क्लीयरेंस के नाम पर अवैध वसूली करता था।

डीसीपी अपराध नीतू कादयान और एडीसीपी अपराध नृपेन्द्र के निर्देशन में गठित साइबर सेल की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस 'बॉस गैंग' के सरगना सहित दो मुख्य आरोपियों को बिहार के मोतिहारी से गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। पकड़े गए आरोपियों में एक बीटेक का छात्र भी शामिल है।

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यूके का बिजनेसमैन बन वाराणसी की महिला से ठगे ₹11 लाख


एसीपी साइबर अपराध विदुष सक्सेना ने पूरे रैकेट का खुलासा करते हुए बताया कि दिनांक 13 मार्च 2026 को वाराणसी की रहने वाली एक पीड़िता (परिवर्तित नाम- पूनम) ने साइबर थाने में तहरीर दी थी। पीड़िता के मुताबिक, मैट्रिमोनियल साइट पर एक अज्ञात व्यक्ति ने खुद को यूके (United Kingdom) का बड़ा कारोबारी बताकर उससे दोस्ती की।

बातों के जाल में फंसाने के बाद आरोपी ने कहा कि उसने पीड़िता के लिए एक बेहद कीमती पार्सल भेजा है, जिसमें महंगी घड़ियां, मोबाइल और ज्वैलरी हैं। इसके कुछ दिन बाद गैंग के अन्य सदस्यों ने दिल्ली एयरपोर्ट से फर्जी कस्टम अधिकारी, जीएसटी अधिकारी और ड्रग ऑफिसर बनकर पीड़िता को कॉल किया और पार्सल छुड़ाने के नाम पर रुपयों की मांग की।


कस्टम से लेकर इमीग्रेशन के नाम पर वसूली


जब पीड़िता ने पैसे ट्रांसफर कर दिए, तो ठगों ने नया पैंतरा चला। उन्होंने कहा, "पार्सल अभी भी नहीं छूट रहा है, इसलिए मैं खुद भारत आ रहा हूँ।" इसके बाद नया ड्रामा रचकर पीड़िता से कहा गया कि वह दिल्ली एयरपोर्ट पहुंच चुका है लेकिन उसे इमीग्रेशन और कस्टम विभाग वालों ने पकड़ लिया है। इस तरह झांसा देकर ठगों ने पीड़िता से करीब 11 लाख रुपये ऐंठ लिए।

डिजिटल फॉरेंसिक और मनी ट्रेल से खुला राज: 500 फर्जी खाते


जब इंस्पेक्टर उदयवीर सिंह के नेतृत्व में साइबर टीम ने मामले की जांच और मनी ट्रेल (पैसों के ट्रांसफर के रास्ते) को फॉलो किया, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। ठगी की यह रकम बिहार के मोतिहारी से संचालित होने वाले विभिन्न 'म्यूल अकाउंट्स' (दूसरों के नाम पर खुले फर्जी खाते) में ट्रांसफर हो रही थी और तुरंत ही एटीएम व कैश के जरिए निकाल ली जा रही थी।

सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल फॉरेंसिक टूल्स की मदद से पुलिस ने लोकेशन ट्रेस की और मोतिहारी (बिहार) में छापेमारी कर दो शातिर अपराधियों को दबोच लिया। पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि उन्होंने अलग-अलग सिंडिकेट के जरिए अब तक 500 से ज्यादा फर्जी बैंक खाते खुलवाए हैं, जिनका इस्तेमाल केवल ठगी का पैसा रोटेट करने और निकालने में किया जाता था।

दुबई से जुड़े हैं इस गैंग के तार!


एसीपी विदुष सक्सेना ने बताया कि आरोपियों के मोबाइल की व्हाट्सएप चैट (WhatsApp Chats) खंगालने पर पता चला है कि इस गिरोह के मुख्य हैंडलर्स दुबई में बैठकर पूरी कॉलिंग और मैट्रिमोनियल साइट्स का सिंडिकेट संभाल रहे हैं। इस संबंध में आगे की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रोहित रंजन (उम्र 19 वर्ष): निवासी- वार्ड नंबर 26, चांदमारी मोहल्ला, थाना नगर, पूर्वी चम्पारण (मोतिहारी), बिहार है, यह आरोपी बीटेक (थर्ड ईयर) का छात्र है और इस गैंग के लिए तकनीकी व बैंक खातों का काम संभालता था।
वहीं, दूसरा आरोपी विजय कुमार (उम्र 28 वर्ष): निवासी- बेलीसराय, जिला स्कूल के पास, थाना नगर, पूर्वी चम्पारण, बिहार। यह आरोपी चाय की दुकान चलाता है और इसका पुराना आपराधिक इतिहास भी है, यह पहले भी जेल जा चुका है।

उनके पास से पुलिस ने 3 एंड्रॉइड मोबाइल फोन (घटना में प्रयुक्त),  ₹10,200 नगद बरामद किया है।