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AI के चलते भारत में बंद हुआ इस अमेरिकी कंपनी का काम, एक झटके में 250 कर्मचारियों की गई नौकरी

रियल एस्टेट टेक कंपनी 'ओपन डोर' ने समेटा भारत में अपना कारोबार, CEO बोले— अब AI आधारित छोटी टीमों के साथ अमेरिका से ही चलेगा काम।

 

नई दिल्ली/बिजनेस डेस्क (भदैनी मिरर): आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव और बदलती कॉर्पोरेट रणनीतियों के बीच भारतीय जॉब मार्केट से एक बड़ी और परेशान करने वाली खबर आ रही है। अमेरिका की जानी-मानी रियल एस्टेट टेक्नोलॉजी कंपनी ओपन डोर (Open Door) ने भारत में अपने सभी ऑपरेशन्स को पूरी तरह से बंद करने का फैसला किया है। कंपनी के इस अचानक लिए गए फैसले की वजह से भारत में काम कर रहे करीब 250 कर्मचारियों की नौकरी एक झटके में चली गई है।

महीनों पहले शुरू हुआ था काम, अब AI संभालेगा कमान

ओपन डोर के सीईओ (CEO) कैज नेजातियन (Kaz Nejatian) ने इस फैसले की पुष्टि करते हुए बताया कि कुछ महीने पहले ही कंपनी ने बड़े उत्साह के साथ भारत में अपना कामकाज शुरू किया था। उस दौरान लगभग 250 कुशल पेशेवरों को हायर किया गया था।

हालांकि, बहुत कम समय में ही कंपनी की कार्यशैली में बड़ा बदलाव आया है। सीईओ के मुताबिक, कंपनी अब भारी-भरकम स्टाफ के बजाय 'छोटी लेकिन AI आधारित टीमों' के जरिए अपने ऑपरेशन्स को आगे बढ़ाना चाहती है। यही वजह है कि भारत में चल रही नौकरियों को अब वापस अमेरिका में ट्रांसफर किया जा रहा है।

भारतीय कर्मचारियों के टैलेंट पर नहीं है शक: CEO

कर्मचारियों की छंटनी के बीच सीईओ कैज नेजातियन ने स्पष्ट किया कि यह फैसला भारतीय वर्कफोर्स की क्वालिटी या काम को लेकर नहीं लिया गया है। उन्होंने भारतीय टीम की तारीफ करते हुए कहा:

"भारतीय कर्मचारियों का काम बेहतरीन था और हम आगे दूसरी कंपनियों को भी उनके नाम रिकमेंड करने के लिए तैयार हैं। यह बदलाव पूरी तरह से हमारी रणनीति और तकनीक (AI) के सक्रिय जुड़ाव के कारण हुआ है।"

नेजातियन ने आगे तर्क दिया कि चूंकि ओपन डोर के सारे ग्राहक अमेरिका में ही हैं, इसलिए उनके भौगोलिक रूप से करीब रहकर काम करना बिजनेस के लिहाज से ज्यादा बेहतर साबित होगा। नई रणनीति के तहत कंपनी अब वर्कफोर्स के मामले में भले ही छोटी दिखेगी, लेकिन एआई की मदद से इसका प्रभाव पहले से कहीं ज्यादा होगा।

क्या खतरे में है भारत का आउटसोर्सिंग मॉडल?

ओपन डोर के इस कदम ने टेक जगत के जानकारों और आर्थिक विश्लेषकों के बीच एक नई चिंता पैदा कर दी है। भारत मौजूदा समय में दुनिया का सबसे बड़ा टेक्नोलॉजी और आउटसोर्सिंग हब माना जाता है, जहाँ दुनिया भर की दिग्गज कंपनियां अपने काम आउटसोर्स करती हैं। लेकिन जिस तरह से एआई अब इंसानी नौकरियों की जगह ले रहा है, उससे भारत के इस पारंपरिक आउटसोर्सिंग मॉडल पर ब्रेक लगने का खतरा मंडराने लगा है।

यह घटना इस बात का साफ संकेत है कि आने वाले समय में बैंकिंग, कस्टमर सपोर्ट और रूटीन प्रशासनिक (Administrative) जिम्मेदारियों वाले सेक्टर्स में काम करने का तरीका पूरी तरह बदलने वाला है।