देश में पेट्रोल-डीजल पर सरकार का बड़ा फैसला, निर्यात शुल्क में हुआ भारी बदलाव; जानें आम जनता पर क्या होगा असर
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच कच्चे तेल में उछाल, डीजल और ATF पर बढ़ा टैक्स; पेट्रोल पर मिली राहत
नई दिल्ली(भदैनी मिरर): अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते नौसैनिक और भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में एक बार फिर आग लग गई है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगभग 2% बढ़कर $84.73 प्रति बैरल के एक महीने के उच्च स्तर पर पहुंच चुकी हैं। इस अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल के बीच भारत सरकार ने पेट्रोल, डीजल और हवाई ईंधन (ATF) पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स (Windfall Tax) को लेकर बड़ा फैसला किया है।
सरकार द्वारा जारी नए आदेश के मुताबिक, डीजल और एटीएफ के निर्यात पर लगने वाले टैक्स में भारी बढ़ोतरी की गई है, जबकि पेट्रोल के निर्यात शुल्क में कटौती की गई है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार ये नई दरें गुरुवार, 16 जुलाई से प्रभावी हो गई हैं।
अब कितना लगेगा विंडफॉल टैक्स?
सरकार द्वारा हर 15 दिनों में की जाने वाली इस समीक्षा के बाद टैक्स की दरों में निम्नलिखित बदलाव किए गए हैं:
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डीजल (Diesel): डीजल के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स को 8.5 रुपये प्रति लीटर से सीधे बढ़ाकर 15.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
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हवाई ईंधन (ATF): एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर लगने वाले टैक्स को 7.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 14.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
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पेट्रोल (Petrol): पेट्रोल के निर्यातकों को राहत देते हुए इस पर लगने वाले टैक्स को 4 रुपये से घटाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई चेन में आई रुकावटों के कारण यह कदम उठाना पड़ा है। अमेरिका द्वारा ईरान पर नौसैनिक नाकाबंदी लागू करने से 'होर्मुज स्ट्रेट' (Hormuz Strait) से होने वाली तेल सप्लाई पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है, जहां से दुनिया की करीब 20% तेल आपूर्ति होती है। इसके अलावा, रूस से कम निर्यात होने के कारण डीजल का रिफाइनिंग मार्जिन काफी बढ़ गया था, जिसके चलते ऑयल मार्केट पर दबाव था।
क्या होता है विंडफॉल टैक्स (Windfall Tax)? विंडफॉल टैक्स सरकार द्वारा किसी कंपनी या उद्योग पर तब लगाया जाता है जब उन्हें किसी बाहरी परिस्थिति के कारण अप्रत्याशित या अचानक भारी मुनाफा (Windfall Profit) होने लगता है। इसका मुख्य उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना और कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय कीमतों का अत्यधिक फायदा उठाकर देश से बाहर तेल खपाने से रोकना है।
आम आदमी की जेब पर क्या होगा असर?
इस फैसले से आम उपभोक्ताओं को घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। यह टैक्स केवल ईंधन के निर्यात (Export) पर लगाया जाता है। घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों (Retail Prices) पर इसका कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। आम जनता के लिए पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर बने रहेंगे।
आज आपके शहर में क्या हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?
गुरुवार को देश के प्रमुख महानगरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें इस प्रकार हैं:
| शहर | पेट्रोल (प्रति लीटर) | डीजल (प्रति लीटर) |
| नई दिल्ली | ₹102.12 | ₹95.20 |
| मुंबई | ₹111.21 | ₹97.83 |
| कोलकाता | ₹113.48 | ₹99.82 |
| चेन्नई | ₹107.78 | ₹99.56 |
थोक खरीदारों के लिए सामान्य हुई व्यवस्था
इससे पहले सरकार ने घरेलू आपूर्ति बनाए रखने के लिए 11 जून को औद्योगिक और कमर्शियल (थोक) खरीदारों के रिटेल पंपों से तेल खरीदने पर रोक लगा दी थी, क्योंकि थोक और खुदरा दरों में करीब 39 रुपये का बड़ा अंतर आ गया था। हालांकि, स्थिति नियंत्रण में आने के बाद 29 जून को इन पाबंदियों को हटा लिया गया था और 1 जुलाई से व्यवस्था पूरी तरह सामान्य हो चुकी है।