{"vars":{"id": "125128:4947"}}

Stock Market Crash: शेयर बाजार में हाहाकार! सेंसेक्स 1000 अंक टूटा, चंद घंटों में डूबे निवेशकों के 9 लाख करोड़ रुपये

FIIs की ताबड़तोड़ बिकवाली से हिला भारतीय बाजार; अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी, रुपया टूटा और क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई मार्केट की टेंशन

 

बिजनेस डेस्क / भदैनी मिरर:भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को चौतरफा बिकवाली के चलते हाहाकार मच गया। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा भारतीय शेयरों की अंधाधुंध बिकवाली से बंबई स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का बेंचमार्क इंडेक्स 'सेंसेक्स' दोपहर 2 बजे तक 1000 से ज्यादा अंक टूट गया, जबकि एनएसई 'निफ्टी' फिसलकर 22,300 के स्तर से नीचे आ गया।

बाजार में आई इस भीषण गिरावट के कारण महज कुछ ही घंटों के भीतर बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप 4,71,86,292 करोड़ रुपये से घटकर 4,62,71,545 करोड़ रुपये रह गया—यानी भारतीय निवेशकों के लगभग 9 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए।

शेयर बाजार में गिरावट की 4 बड़ी वजहें (Key Triggers):

  1. विदेशी निवेशकों (FIIs) की ताबड़तोड़ बिकवाली:

    विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय बाजार से लगातार अपना पैसा निकाल रहे हैं। अकेले 30 सितंबर को FIIs ने 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेचे, जबकि पिछले दो कारोबारी सत्रों में यह बिकवाली 20,000 करोड़ रुपये से अधिक तक पहुंच गई है।

  2. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड (US Bond Yield) में उछाल:

    अमेरिका की 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.3 प्रतिशत के पार पहुंच गई है। अमेरिका में ज्यादा रिटर्न और सुरक्षित विकल्प मिलने से विदेशी निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों (Emerging Markets) से पैसा निकालकर अमेरिकी फिक्स्ड-इनकम एसेट्स में लगा रहे हैं।

  3. रुपये में रिकॉर्ड गिरावट:

    अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया टूटकर 96 के पार चला गया है। कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों के डॉलर-बेस्ड रिटर्न को घटा देता है, जिससे FIIs का रुझान भारतीय बाजार के प्रति नकारात्मक हो जाता है।

  4. क्रूड ऑयल और मध्य-पूर्व का तनाव:

    ईरान के साथ जारी संघर्ष और कच्चे तेल (Crude Oil) की आपूर्ति में रुकावट की आशंका ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था और मार्केट वोलेटिलिटी (India VIX) के लिए बड़ा खतरा हैं।

क्या निवेशकों को बाजार से बाहर निकल जाना चाहिए?

बाजार में आए इस तूफान के बीच मार्केट एक्सपर्ट्स और '021 ट्रेड' के संस्थापक व सीईओ ईशान लाजरस (Eshaan Lazarus) का कहना है कि निफ्टी 50 पूरे बाजार की तस्वीर नहीं दिखाता।

  • मिडकैप और स्मॉलकैप का प्रदर्शन बेहतर:

    ईशान लाजरस के अनुसार, अधिकांश खुदरा निवेशकों का रुझान बड़े शेयरों (Large Caps) की तुलना में मिडकैप और स्मॉलकैप की ओर बढ़ा है। 'Nifty MIDSMALL400' इंडेक्स अपने ऑल-टाइम हाई से महज 5 से 6 फीसदी ही नीचे है।

  • अपेक्षाओं का दबाव:

    2020 से 2025 के बीच नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में रजिस्टर्ड निवेशकों की संख्या तीन गुना से अधिक बढ़ी है। नए निवेशकों ने 20 से 30 प्रतिशत का सालाना रिटर्न देखा है, ऐसे में एक अंक (Single-Digit) का रिटर्न उनके लिए निराशाजनक लग सकता है।

  • दीर्घकालिक दृष्टिकोण (Long-term View):

    विशेषज्ञों की सलाह है कि सिर्फ एक दिन की गिरावट को देखकर जल्दबाजी में पैनिक सेलिंग नहीं करनी चाहिए। लंबी अवधि के लिए मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में निवेश का अवसर अभी भी बना हुआ है।