शेयर बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 1000 अंक टूटा, निफ्टी 22,900 के नीचे; निवेशकों के ₹6 लाख करोड़ स्वाहा
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, अमेरिका-ईरान तनाव और एफआईआई (FII) की भारी बिकवाली से दलाल स्ट्रीट पर मची अफरा-तफरी।
भदैनी मिरर डेस्क: सप्ताह की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए भारी तबाही लेकर आई। वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली के कारण सोमवार को दलाल स्ट्रीट पर चौतरफा बिकवाली देखने को मिली।
कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) 1,003.11 अंक यानी 1.36% की जोरदार गिरावट के साथ 72,892.63 के स्तर पर आ गया। वहीं, एनएसई निफ्टी50 (NSE Nifty50) भी 313.00 अंक (1.35%) टूटकर 22,863.30 के स्तर पर आ गया। बाजार खुलने से पहले गिफ्ट निफ्टी (GIFT Nifty) के सुस्त संकेतों ने ही बिकवाली का रुझान स्पष्ट कर दिया था।
निवेशकों की संपत्ति से ₹6 लाख करोड़ गायब
बाजार में आई इस अचानक गिरावट से निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। महज कुछ ही घंटों के भीतर बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण (Market Cap) घटकर लगभग ₹476 लाख करोड़ रह गया, जिससे निवेशकों के करीब ₹6 लाख करोड़ स्वाहा हो गए। उल्लेखनीय है कि भारतीय बाजार में पिछले सात कारोबारी सत्रों से लगातार गिरावट का दौर जारी है, जिससे निफ्टी और सेंसेक्स अब तक लगभग 6% तक टूट चुके हैं।
सभी 30 सेंसेक्स शेयर लाल निशान में
सुबह के कारोबारी सत्र के दौरान सेंसेक्स के सभी 30 शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। प्रमुख रूप से टूटने वाले शेयरों में बजाज फाइनेंस, कोटक महिंद्रा बैंक, एचडीएफसी बैंक, बजाज फिनसर्व, महिंद्रा एंड महिंद्रा, हिंदुस्तान यूनिलीवर और एलएंडटी (L&T) शामिल रहे।
गिरावट के 3 सबसे बड़े कारण:
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कच्चे तेल (Crude Oil) में उछाल: ब्रांड क्रूड वायदा 1.5% उछलकर $106 प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में लगातार सात महीनों से जारी व्यवधान ने तेल की आपूर्ति को प्रभावित किया है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा क्रूड आयातक है; ऐसे में तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ने और महंगाई का खतरा गहरा गया है।
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विदेशी निवेशकों (FII) की भारी बिकवाली: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा भारतीय शेयरों में बिकवाली थमने का नाम नहीं ले रही है। सितंबर महीने में अब तक FIIs $1.8 अरब के शेयर बेच चुके हैं, जिससे इस साल उनकी कुल बिकवाली $25.86 अरब तक पहुंच गई है।
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रुपये पर दबाव और अमेरिकी डॉलर की मजबूती: डॉलर सूचकांक में मजबूती और क्रूड के दामों में बढ़ोतरी के कारण भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 20 पैसे कमजोर होकर और निचले स्तर पर चला गया है।
आगे कैसा रहेगा बाजार का मूड?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक वार्ताओं के नतीजे और कच्चे तेल की कीमतें बाजार की दिशा तय करेंगी। इसके अलावा घरेलू मोर्चे पर जारी होने वाले औद्योगिक उत्पादन (IIP) डेटा, मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई आंकड़े और ऑटो बिक्री के आंकड़े भी निवेशकों की रडार पर रहेंगे। वहीं, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसलों के बाद वैश्विक बॉन्ड यील्ड और जॉब्स डेटा पर भी वैश्विक बाजारों की नजर टिकी हुई है।