Sone Chandi Ka Aaj Ka Rate: सोना ₹1230 टूटा, चांदी भी लुढ़की, जानें गिरावट की वजह और आगे क्या
अमेरिकी महंगाई आंकड़ों और ब्याज दरों की अनिश्चितता के बीच सोना–चांदी दबाव में, निवेशकों की नजर फेड की अगली बैठक पर
नई दिल्ली | मंगलवार को सर्राफा बाजार में जोरदार गिरावट देखने को मिली। सोने और चांदी दोनों की कीमतों में लगातार दूसरे सत्र में कमजोरी दर्ज की गई। घरेलू बाजार में सोना करीब ₹1230 टूटकर 1.54 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया, जबकि चांदी ₹4830 की गिरावट के साथ 2.36 लाख रुपये प्रति किलो पर आ गई।
शुरुआती कारोबार में Multi Commodity Exchange (MCX) पर भी दबाव दिखा। यहां चांदी लगभग ₹4,131 फिसलकर 2.40 लाख रुपये प्रति किलो पर आ गई, वहीं सोना करीब ₹1,145 गिरकर 1.54 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड करता नजर आया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्या रहा हाल
एशियाई ट्रेडिंग घंटों के दौरान इंटरनेशनल मार्केट में भी कीमती धातुओं पर दबाव बना रहा। स्पॉट गोल्ड करीब 0.43% टूटकर 4,992 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गया, जबकि स्पॉट सिल्वर में लगभग 3% की तेज गिरावट दर्ज की गई और कीमत 74.24 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई।
गिरावट की बड़ी वजह क्या है?
विशेषज्ञों के मुताबिक, सोना–चांदी की कीमतों पर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों का मिला-जुला असर पड़ा है। अमेरिका में जनवरी महीने की उपभोक्ता महंगाई उम्मीद से कम रही, लेकिन रोजगार वृद्धि अनुमान से ज्यादा मजबूत रही।
इन संकेतों के बाद बाजार की नजर अब Federal Reserve मौद्रिक नीति पर टिक गई है। मौजूदा अनुमान है कि 18 मार्च की बैठक में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होगा, हालांकि ट्रेडर्स जुलाई तक कटौती की संभावना को पहले से ही प्राइस-इन कर रहे हैं।
आमतौर पर ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें सोने को सपोर्ट देती हैं, लेकिन फिलहाल नीति को लेकर अनिश्चितता के कारण कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है।
निवेशकों की नजर किन संकेतों पर?
अब बाजार सहभागियों का फोकस फेड की बैठक के मिनट्स, चौथी तिमाही के जीडीपी आंकड़ों और कोर PCE प्राइस इंडेक्स पर है। ये आंकड़े आगे ब्याज दरों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
भू-राजनीति और ग्लोबल फैक्टर
भू-राजनीतिक मोर्चे पर ईरान–अमेरिका संबंधों को लेकर आए बयान ने भी बाजार भावना को प्रभावित किया है। इसके अलावा अमेरिकी बाजार राष्ट्रपति दिवस के चलते बंद रहे, जबकि चीन समेत एशिया के कई बाजार लूनर न्यू ईयर की छुट्टियों के कारण बंद थे। कम ट्रेडिंग वॉल्यूम के चलते कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिला।