Retail Stocks Crash: V2 Retail का शेयर 19% टूटा, 52-हफ़्ते के निचले स्तर पर पहुँचा DMart
सितंबर तिमाही (Q2FY27) के बिजनेस अपडेट के बाद रिटेल कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली; DMart ने 15 नए स्टोर जोड़े फिर भी शेयर 5% से ज़्यादा फिसला।
भदैनी मिरर बिज़नेस डेस्क: सोमवार के कारोबारी सत्र में रिटेल क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। सितंबर तिमाही (Q2FY27) के बिजनेस अपडेट जारी होने के बाद निवेशकों की बिकवाली के चलते V2 Retail का शेयर 19% तक टूट गया, जबकि Avenue Supermarts (DMart) के शेयर में भी 5% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
एक तरफ जहाँ बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) में बढ़त का माहौल था, वहीं दूसरी ओर रिटेल स्टॉक्स पर भारी दबाव नज़र आया।
V2 Retail: 19% की गिरावट के साथ नए निचले स्तर पर
बीएसई (BSE) पर इंट्राडे ट्रेड के दौरान V2 Retail का शेयर 19% गिरकर ₹162.55 के अपने 52-हफ़्ते के नए निचले स्तर (52-week low) पर पहुँच गया। बाज़ार खुलते ही पहले 35 मिनट के भीतर ही बीएसई और एनएसई पर मिलाकर कंपनी के लगभग 59.6 लाख शेयरों का भारी ट्रेडिंग वॉल्यूम देखा गया।
DMart: रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद शेयर पस्त
डीमार्ट (DMart) ब्रांड नाम से रिटेल चेन चलाने वाली कंपनी 'एवेन्यू सुपरमार्ट्स' (Avenue Supermarts) का शेयर intraday में 5.87% तक फिसलकर ₹3,589.20 के आसपास कारोबार करता दिखा। यह शेयर अपने 52-हफ़्ते के निचले स्तर (₹3,528.65) के काफी करीब पहुँच चुका है।
DMart के Q2FY27 बिजनेस अपडेट के मुख्य बिंदु
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स्टैंडअलोन रेवेन्यू: सितंबर तिमाही (Q2FY27) में कंपनी का स्टैंडअलोन रेवेन्यू सालाना आधार पर (YoY) 18.4% बढ़कर ₹19,206 करोड़ हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही (Q2FY26) में ₹16,219 करोड़ था।
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स्टोर नेटवर्क में विस्तार: दूसरी तिमाही में कंपनी ने 15 नए स्टोर जोड़े, जिससे सितंबर 2026 तक कुल स्टोर की संख्या बढ़कर 518 हो गई है। (पहली तिमाही Q1FY27 में केवल 3 स्टोर जोड़े गए थे)।
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भौगोलिक विविधीकरण: कंपनी सालाना आधार पर अपने नेटवर्क में लगभग 15% नए स्टोर जोड़ने की योजना पर काम कर रही है, जिससे इसका बिजनेस प्रोफाइल और मजबूत हो रहा है।
क्यों दबाव में हैं रिटेल स्टॉक्स?
क्रिसिल रेटिंग्स (CRISIL Ratings) के अनुसार, एवेन्यू सुपरमार्ट्स का मुख्य फोकस नॉन-डिस्क्रिशनरी 'फूड्स एंड ग्रॉसरी' (F&G) सेगमेंट पर है, जो कमजोर उपभोक्ता खर्च के दौर में भी कंपनी को मजबूती देता है। इसके बावजूद, बाज़ार की मौजूदा उम्मीदों और मार्जिन पर दबाव की आशंकाओं के चलते निवेशकों ने मुनाफावसूली और बिकवाली का रुख अपनाया है, जिसका सीधा असर शेयर की कीमतों पर पड़ा है।