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नियमों के उल्लंघन पर RBI का बड़ा एक्शन, कई बैंकों पर ठोका जुर्माना 
 

KYC, गोल्ड लोन LTV और ग्राहक सेवा नियमों में खामी - RBI ने बैंकों व NBFCs पर की सख्त कार्रवाई

 

नई दिल्ली। नियामकीय नियमों की अनदेखी करने वाले बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) पर Reserve Bank of India ने कड़ा रुख अपनाते हुए लाखों रुपये का मौद्रिक जुर्माना लगाया है।

RBI की ओर से जारी बयान के मुताबिक, Bank of Maharashtra पर 32.50 लाख रुपये, DCB Bank पर 29.60 लाख रुपये और CSB Bank पर 63.60 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
इसके अलावा NBFC सेक्टर में Navi Finserv पर 3.80 लाख रुपये और IIFL Finance पर 5.30 लाख रुपये का दंड लगाया गया है।

जुर्माने की प्रमुख वजहें

RBI के अनुसार—

  • बैंक ऑफ महाराष्ट्र स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़े सदस्यों का डेटा क्रेडिट सूचना कंपनियों को उपलब्ध कराने में विफल रहा। साथ ही कुछ खातों में वास्तविक लाभार्थी (Beneficial Owner) की पहचान भी नहीं की गई।
  • CSB बैंक ने अपने बैंक प्रतिनिधियों के साथ ऐसे कार्यों के लिए समझौता किया जो तय दायरे से बाहर थे। इसके अलावा कुछ बचत खातों में शुल्क लगाए गए, लेकिन ग्राहकों को इसकी पूर्व सूचना नहीं दी गई।
  • DCB बैंक कुछ गैर-कृषि गोल्ड लोन खातों में निर्धारित Loan-to-Value (LTV) अनुपात को ऋण अवधि के दौरान बनाए रखने में असफल रहा।

वहीं NBFC सेगमेंट में—

  • IIFL Finance पुनर्गठन प्रक्रिया के दौरान कुछ खातों को समय पर Non-Performing Asset (NPA) घोषित नहीं कर पाया।
  • Navi Finserv ने बकाया वसूली के लिए ग्राहकों से विषम समय पर संपर्क किया और संदेश भेजते समय निर्धारित आचार संहिता का पालन नहीं किया।


सहकारी बैंकों पर भी RBI की कार्रवाई

केवल बड़े बैंक ही नहीं, बल्कि सहकारी बैंकों पर भी केंद्रीय बैंक की गाज गिरी है।

RBI ने राजस्थान के गंगानगर केंद्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड पर KYC मानदंडों के उल्लंघन के लिए 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। बैंक खातों के जोखिम वर्गीकरण की नियमित समीक्षा और ग्राहकों के KYC अपडेट में विफल रहा था।

वहीं ओडिशा के बरहामपुर को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक लिमिटेड पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। यह कार्रवाई 31 मार्च 2025 तक की वित्तीय स्थिति के निरीक्षण के बाद की गई।

RBI ने स्पष्ट किया है कि ये सभी जुर्माने नियामकीय खामियों से जुड़े हैं और इनका ग्राहकों के वैध लेनदेन पर कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा।