{"vars":{"id": "125128:4947"}}

National News Wrap: भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 716.9 अरब डॉलर पहुंचा; चीनी की कीमतों पर सरकार की सफाई

देश-दुनिया की बड़ी खबरें: विदेशी मुद्रा भंडार में 9.9 अरब डॉलर का उछाल, चीनी के बढ़े दामों पर सरकार का बयान और भारत-ब्रिटेन में डिफेंस डील पर चर्चा

 

बिजनेस व नेशनल डेस्क (भदैनी मिरर)। देश के आर्थिक और रणनीतिक मोर्चे पर कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए हैं। एक तरफ जहां भारत का विदेशी मुद्रा भंडार फिर से नए रिकॉर्ड की ओर बढ़ रहा है, वहीं सरकार ने चीनी की आसमान छूती कीमतों पर अपनी स्थिति साफ की है। दूसरी ओर, भारत और ब्रिटेन ने रक्षा क्षेत्र में अपने संबंधों को और मजबूत करने का संकल्प लिया है।

1. देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 716.9 अरब डॉलर पर पहुंचा

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 14 अगस्त को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserve) 9.90 अरब डॉलर बढ़कर 716.91 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है। इससे पिछले सप्ताह भी इसमें 14.136 अरब डॉलर की बड़ी बढ़त देखी गई थी। आरबीआई के मुताबिक, विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (FCA) भी 7.225 अरब डॉलर बढ़कर 581.851 अरब डॉलर हो गई हैं।

2. चीनी के दाम बढ़ने पर सरकार का स्पष्टीकरण, जमाखोरी पर लगाम की तैयारी

देश में चीनी के खुदरा भाव 48.18 रुपये से बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने पर केंद्र सरकार ने रुख साफ किया है। सरकार का कहना है कि चीनी की कीमतें बढ़ने की मुख्य वजह इथेनॉल उत्पादन नहीं, बल्कि कम उत्पादन, त्यौहारी मांग, खराब मौसम और जमाखोरी है। घरेलू उत्पादन घटकर 306 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। कीमतों को नियंत्रित करने के लिए डीलरों पर 400 टन की स्टॉक सीमा (Stock Limit) लागू कर दी गई है और 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात को मंजूरी दी गई है।

3. भारत-ब्रिटेन रक्षा सहयोग: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा पर जोर

नई दिल्ली में आयोजित 25वीं भारत-UK रक्षा परामर्श समूह की बैठक में दोनों देशों ने सैन्य संबंधों को नया आयाम देने पर सहमति जताई। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय के स्थायी अवर सचिव जेरेमी पॉकलिंगटन की सह-अध्यक्षता में हुई इस बैठक में 'इंडिया-UK विजन 2035' के तहत संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण और अनुसंधान सहयोग की समीक्षा की गई। दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific Region) में समुद्री सुरक्षा को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।