Indian Rupee News: शेयर बाजार की मंदी के बीच मजबूत हुआ 'रुपया', 6 हफ्ते के उच्चतम स्तर पर पहुंचा
डॉलर के मुकाबले 10 पैसे चढ़कर 94.39 के स्तर पर आया रुपया; FCNR-B डिपॉजिट इनफ्लो और RBI के दखल से मिला भारतीय मुद्रा को सहारा
भदैनी मिरर (बिजनेस डेस्क): घरेलू शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता के बीच भारतीय मुद्रा 'रुपये' ने जबरदस्त मजबूती दिखाई है। सोमवार (7 सितंबर 2026) को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 10 पैसे की बढ़त के साथ खुला और लगभग छह हफ्ते के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।
पिछले कारोबारी सत्र में 94.49 पर बंद होने के बाद, रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर 94.39 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था। वैश्विक स्तर पर विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भारतीय मुद्रा के लिए यह पिछले एक महीने से ज्यादा समय का सबसे बेहतरीन हफ्ता साबित हो रहा है।
रुपये में तेजी के क्या हैं मुख्य कारण?
विदेशी मुद्रा बाजार के जानकारों और कमोडिटी एक्सपर्ट्स के अनुसार, रुपये में आई इस तेजी के पीछे तीन मुख्य कारण हैं:
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FCNR-B डिपॉजिट में भारी इनफ्लो: फॉरेक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, विदेशी मुद्रा अनिवासी यानी FCNR-B (Foreign Currency Non-Resident) बैंक जमा में भारी इनफ्लो देखने को मिला है। डॉलर के इस इनफ्लो ने रुपये को मजबूत आधार दिया।
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आरबीआई (RBI) का कड़ा रुख: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने रुपये में आ रही गिरावट को थामने के लिए पिछले दो हफ्तों में फॉरेक्स मार्केट में लगातार दखल दिया है और डॉलर की बिकवाली कर रुपये को सहारा दिया है।
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अहम सपोर्ट जोन: एक्सपर्ट्स का मानना है कि ₹94.00 से ₹94.20 प्रति डॉलर का स्तर रुपये के लिए बेहद मजबूत सपोर्ट जोन बना हुआ है।
आगे क्या हैं बड़े वैश्विक ट्रिगर्स?
रुपये की मजबूती के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ चुनौतियां अभी भी बरकरार हैं:
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क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) में उबाल: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के कारण पश्चिम एशिया से क्रूड सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं, जिससे ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) का भाव उछलकर $97 प्रति बैरल पर पहुंच गया है। कच्चा तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल बढ़ता है।
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अमेरिकी फेडरल रिजर्व का फैसला: अमेरिका में अगस्त महीने के नॉन-फार्म पेरोल आंकड़ों में उम्मीद से ज्यादा (1,62,000) बढ़ोतरी हुई है। इससे उम्मीद जताई जा रही है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक (US Fed) अपनी आगामी बैठक में ब्याज दरें बढ़ा सकता है, जिस पर भारतीय बॉन्ड और करेंसी मार्केट की बारीक नजर रहेगी।