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IDBI Bank Share Price: निजीकरण की खबरों से IDBI बैंक के शेयरों में आया भूचाल

सुस्त पड़े निजीकरण (Privatisation) को दोबारा रफ्तार देने की तैयारी में सरकार; एमिरेट्स NBD और फेयरफैक्स की बोलियों पर फिर हो सकता है विचार

 

बिजनेस डेस्क (भदैनी मिरर): शेयर बाजार में बुधवार को बैंकिंग सेक्टर से एक बेहद बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई। सरकारी और निजी हिस्सेदारी वाले IDBI Bank के शेयरों में आज 19 फीसदी का एक जोरदार उछाल देखा गया। बुधवार, 17 जून 2026 को इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान बैंक का शेयर ₹91.49 के स्तर पर पहुंच गया, जिससे यह 'निफ्टी स्मॉलकैप 100' (NIFTY Smallcap 100) इंडेक्स में सबसे ज्यादा बढ़त बनाने वाले शेयरों में शुमार हो गया।

दोपहर 12:35 बजे नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर बैंक के शेयर लगभग 16.86% की तेजी के साथ ₹90.16 पर कारोबार कर रहे थे। हालांकि, यह शेयर अभी भी 5 जनवरी 2026 को छुए गए अपने 52-सप्ताह के उच्च स्तर ₹118.38 से करीब 29.3% नीचे ट्रेड कर रहा है।

वॉल्यूम में 13 गुना से ज्यादा का उछाल, निवेशकों का बढ़ा भरोसा

बुधवार को IDBI बैंक के शेयरों में ट्रेडिंग एक्टिविटी असाधारण रूप से तेज रही। बाजार में इस स्टॉक का ट्रेडिंग वॉल्यूम इसके रोजाना के औसत वॉल्यूम से 13.27 गुना ज्यादा दर्ज किया गया। बाजार के जानकारों के मुताबिक, वॉल्यूम में इस तरह का अचानक और बड़ा स्पर्ट (उछाल) यह दर्शाता है कि बड़े संस्थागत निवेशक और रिटेल बायर्स इस समय आईडीबीआई बैंक में भारी दिलचस्पी ले रहे हैं।

क्यों आई शेयरों में अचानक यह तेजी?

IDBI बैंक में आई इस तूफानी तेजी के पीछे एक मीडिया रिपोर्ट है। दरअसल, 'द इकोनॉमिक टाइम्स' (ET) की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत सरकार काफी समय से अटके पड़े IDBI बैंक के निजीकरण (Privatisation) की प्रक्रिया को एक बार फिर से जीवित (Revive) करने के विकल्पों पर विचार कर रही है।

सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि सरकार इस बात की समीक्षा कर रही है कि क्या प्रेम वत्स के नेतृत्व वाली 'फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स' और 'एमिरेट्स NBD' द्वारा पहले दी गई उन बोलियों (Bids) पर दोबारा विचार किया जा सकता है, जो रिजर्व प्राइस (आरक्षित मूल्य) की सीमा पार न कर पाने के कारण खारिज हो गई थीं।

IDBI Bank के चौथी तिमाही (Q4) के नतीजे एक नजर में

हाल ही में जारी standalone वित्तीय परिणामों के मुताबिक बैंक की स्थिति इस प्रकार है:

  • नेट प्रॉफिट (शुद्ध लाभ): मार्च तिमाही में बैंक का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 5% गिरकर ₹1,943 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही में ₹2,051 करोड़ था। मुनाफे में इस गिरावट की मुख्य वजह बैंक के फंड की लागत (इंटरेस्ट एक्सपेंडेड) में बढ़ोतरी होना है।

  • नेट इंटरेस्ट इनकम (NII): बैंक की शुद्ध ब्याज आय जनवरी-मार्च तिमाही में 11.7% बढ़कर ₹7,798 करोड़ पर पहुंच गई।

  • NPA में बड़ी राहत (Asset Quality): बैंक का ग्रॉस एनपीए (Gross NPA) घटकर ₹6,028 करोड़ रह गया है। प्रतिशत के लिहाज से ग्रॉस एनपीए 66 बेसिस पॉइंट सुधरकर 2.32% पर आ गया है, जो पिछले साल 2.98% था।

  • नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM): मार्च तिमाही में बैंक का एनआईएम भी सुधरकर 4.15% हो गया है, जो एक साल पहले 4% था।

IDBI बैंक के निजीकरण का इतिहास: 2016 से अब तक का सफर

यह दूसरी बार है जब सरकार इस बैंक के रणनीतिक विनिवेश को लेकर इतनी गंभीर दिख रही है।

  • फरवरी 2016: तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट भाषण में पहली बार इसके निजीकरण का संकेत दिया था, लेकिन वैल्यूएशन विवाद के कारण यह प्रयास विफल रहा।

  • जनवरी 2019: एलआईसी (LIC) ने बैंक को एनपीए के संकट से उबारने के लिए विनिवेश प्रक्रिया के तहत ₹21,624 करोड़ में 51% की नियंत्रण हिस्सेदारी खरीदी। इसके बाद आरबीआई ने इसे निजी क्षेत्र के बैंक के रूप में रीक्लासिफाइड किया।

  • दिसंबर 2020: LIC की हिस्सेदारी घटकर 49.24% होने पर इसे 'एसोसिएट कंपनी' का दर्जा मिला।

  • मई 2021: केंद्रीय कैबिनेट ने इसके रणनीतिक विनिवेश और प्रबंधन नियंत्रण के ट्रांसफर को सैद्धांतिक मंजूरी दी।

  • अक्टूबर 2022 से जनवरी 2023: केपीएमजी इंडिया को ट्रांजैक्शन एडवाइजर नियुक्त किया गया और सरकार ने 60.72% हिस्सेदारी बेचने के लिए बोलियां (EoI) आमंत्रित कीं। सेबी ने सरकार को सार्वजनिक शेयरधारक के रूप में रीक्लासिफाइड करने की मंजूरी दी।

  • अगस्त 2025 से फरवरी 2026: सेबी ने बिक्री पूरी होने पर LIC को भी पब्लिक शेयरहोल्डर मानने की हरी झंडी दी और लंबे ड्यू डिलिजेंस के बाद फरवरी 2026 में 'एमिरेट्स NBD' और 'फेयरफैक्स इंडिया' से फाइनेंशियल बोलियां प्राप्त हुईं।

मार्केट कैप: एनएसई (NSE) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 17 जून 2026 तक IDBI बैंक का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन (बाजार पूंजीकरण) ₹98,126.42 करोड़ पर पहुंच गया है।