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चांदी 2.70 लाख प्रति किलो के करीब पहुंची, सोना के दामों में भी उछाल

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और डॉलर की कमजोरी से सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ी, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना-चांदी में तेजी

 
बिजनेस डेस्क। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक बाजारों में सुरक्षित निवेश की मांग तेज हो गई है। इसका सीधा असर कीमती धातुओं की कीमतों पर भी देखने को मिल रहा है।
गुरुवार को चांदी की कीमत में 4560 रुपये का उछाल दर्ज किया गया, जिसके बाद इसका भाव करीब 2.70 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया। वहीं सोने की कीमत 830 रुपये बढ़कर लगभग 1.62 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गई।
विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता और डॉलर की कमजोरी के कारण निवेशक सोना-चांदी जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं।
वैश्विक बाजार में भी सोना-चांदी मजबूत
एशियाई कारोबार के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमती धातुओं में मजबूती देखी गई।
  • स्पॉट गोल्ड लगभग 1% बढ़कर 5,187 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया।
  • स्पॉट सिल्वर में करीब 2.5% की तेजी आई और इसकी कीमत 85.12 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई।
विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता के दौर में निवेशक जोखिम भरे निवेश से बचकर सुरक्षित परिसंपत्तियों में पैसा लगा रहे हैं।
पश्चिम एशिया में तनाव से बढ़ी बाजार की चिंता
कीमती धातुओं की कीमतों में यह तेजी ऐसे समय आई है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान पर लगातार हवाई हमले किए जा रहे हैं, वहीं ईरान भी कई क्षेत्रों में मिसाइल हमलों के जरिए जवाब दे रहा है।
इस संघर्ष के कारण रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की खबरें भी सामने आई हैं। यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। इसके बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता और बढ़ गई है।
डॉलर में कमजोरी से कमोडिटी को मिला सहारा
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स फिलहाल 98 के स्तर तक फिसल गया है। डॉलर के कमजोर होने से डॉलर में मूल्य तय होने वाली कमोडिटी विदेशी निवेशकों के लिए सस्ती हो जाती है, जिससे उनकी मांग बढ़ जाती है।
इसी कारण सोना और चांदी में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ती दिखाई दे रही है।
फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर नजर
वैश्विक निवेशक अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति पर भी नजर बनाए हुए हैं।
बाजार को पहले उम्मीद थी कि जुलाई में ब्याज दरों में कटौती हो सकती है, लेकिन अब संभावना सितंबर में दर कटौती की मानी जा रही है। इसके बावजूद निवेशकों को इस साल दो बार 25-25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की उम्मीद बनी हुई है।