गौतम अडानी को अमेरिकी कोर्ट से मिली बड़ी राहत: रिश्वत का मामला पूरी तरह खारिज, अडानी बोले– 'सच्चाई की हुई जीत'
कोर्ट ने न्याय विभाग की याचिका को दी मंजूरी, न्याय विभाग ने माना— "कानूनी रूप से कमजोर था मामला"
वाराणसी (भदैनी मिरर)। अडानी समूह के चेयरमैन और प्रसिद्ध उद्योगपति गौतम अडानी के लिए अमेरिका से बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिका की एक अदालत ने भारतीय अरबपति गौतम अडानी के खिलाफ लंबित आपराधिक मामले को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। यह फैसला अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) द्वारा मुकदमे को वापस लेने के बाद आया है।
कोर्ट ने न्याय विभाग की याचिका को दी मंजूरी
ब्रुकलिन स्थित अमेरिकी जिला जज निकोलस गारौफिस ने सरकारी वकीलों की अपील को स्वीकार करते हुए केस को बंद करने का आदेश जारी किया। कोर्ट की सुनवाई के दौरान जज ने अडानी से यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या मामला वापस लेने के पीछे कोई वादा या प्रलोभन शामिल था।
गौरतलब है कि साल 2024 में जब यह आरोप सामने आए थे, तब अडानी ने अमेरिका में 10 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया था। हालांकि, सुनवाई के दौरान जज ने साफ किया कि इस निवेश प्रस्ताव का न्याय विभाग द्वारा केस वापस लेने के फैसले पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।
न्याय विभाग ने माना— "कानूनी रूप से कमजोर था मामला"
इस साल मई में अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने अदालत से इस मामले को खारिज करने की गुहार लगाई थी। विभाग ने जुलाई में अदालत में अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि "यह मामला पहले कभी दर्ज ही नहीं किया जाना चाहिए था।"
न्याय विभाग का मानना था कि यह केस कानूनी रूप से काफी कमजोर है और इसका बड़ा हिस्सा भारत के आंतरिक क्षेत्राधिकार से जुड़ा हुआ है। अधिकारियों का तर्क था कि अमेरिका का दुनिया का पुलिसकर्मी बनना कूटनीतिक संबंधों में तनाव पैदा करता है और घरेलू संसाधनों को व्यर्थ करता है। विभाग ने स्पष्ट किया कि भारत अपने आंतरिक मामलों को संभालने में पूरी तरह सक्षम है।
कोर्ट के फैसले पर गौतम अडानी का बयान
अदालत के इस फैसले के बाद अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए लिखा:
"मैं अमेरिकी अदालत के फैसले का विनम्रता के साथ स्वागत करता हूं और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति गहरा सम्मान रखता हूं। इस चुनौतीपूर्ण दौर में सच्चाई, निष्पक्षता और कानून के शासन में हमारी आस्था हमेशा अटूट रही।"
उन्होंने आगे लिखा कि वह उन सभी लोगों के आभारी हैं जिन्होंने इस मुश्किल समय में उनकी व्यवस्था और भारत की न्याय क्षमता पर भरोसा बनाए रखा। उन्होंने दोहराया कि अडानी ग्रुप राष्ट्र निर्माण और स्थायी मूल्य सृजन के अपने संकल्प को जारी रखेगा।
क्या था पूरा विवाद?
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 में गौतम अडानी और उनके बेटे सागर अडानी सहित अन्य लोगों पर आरोप लगा था कि उन्होंने भारत में सोलर एनर्जी प्लांट की मंजूरी पाने के लिए कथित तौर पर रिश्वत की पेशकश की थी और अमेरिकी निवेशकों को भ्रामक जानकारी दी थी। हालांकि, अब अमेरिकी कोर्ट द्वारा केस खारिज किए जाने के बाद इस पूरे विवाद पर विराम लग गया है।