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टाटा ग्रुप के शेयरों में भूचाल: टाटा ट्रस्ट्स ने चंद्रशेखरन के एक्सटेंशन को बताया अवैध; SP ग्रुप की हिस्सेदारी बेचने की खबर से 8% तक टूटे स्टॉक्स

 टाटा ट्रस्ट्स ने री-अपॉइंटमेंट को दिया झटका, RBI ने प्राइवेट स्टेटस बनाए रखने की अर्जी भी की खारिज

 

बिजनेस डेस्क (भदैनी मिरर)। भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को टाटा समूह (Tata Group) के शेयरों में जबरदस्त बिकवाली और हलचल देखने को मिली। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल विस्तार को लेकर टाटा ट्रस्ट्स (Tata Trusts) की ओर से उठाई गई गंभीर आपत्तियों और शापूरजी पालोनजी (SP Group) द्वारा अपनी हिस्सेदारी बेचने के प्रस्ताव के बाद समूह की कंपनियों के शेयर 8 प्रतिशत तक टूट गए।

चंद्रशेखरन के एक्सटेंशन और RBI के रुख से बढ़ा विवाद

मामला तब और गरमा गया जब टाटा संस में बहुमांश हिस्सेदारी रखने वाले 'टाटा ट्रस्ट्स' ने एन. चंद्रशेखरन के 5 साल के सेवा विस्तार (Reappointment) को अवैध करार दे दिया। इसके अलावा, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा टाटा संस को गैर-सूचीबद्ध (Private) कंपनी बनाए रखने की याचिका खारिज किए जाने से भी अनिश्चितता बढ़ी है। आगामी वार्षिक साधारण सभा (AGM) अब चंद्रशेखरन के भविष्य और बोर्ड में उनकी भूमिका तय करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।

SP ग्रुप की ₹25,000 करोड़ की हिस्सेदारी बिक्री का प्लान

बाजार में गिरावट का एक मुख्य कारण टाटा संस के दूसरे सबसे बड़े शेयरधारक शापूरजी पालोनजी ग्रुप (SP Group) की ओर से आया प्रस्ताव भी रहा। SP ग्रुप ने टाटा संस में अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा कम से कम 250 अरब रुपये ($2.61 बिलियन) में बेचने की योजना पेश की है। इस प्रस्ताव में 18 महीनों के भीतर दो किश्तों में बायबैक (Share Buyout) शामिल है।

शेयर बाजार में टाटा के शेयरों का हाल:

बिकवाली के दबाव में टाटा समूह के प्रमुख स्टॉक्स में भारी गिरावट दर्ज की गई:

  • टाटा केमिकल्स (Tata Chemicals): 7.8% तक टूट गया।

  • टाटा इन्वेस्टमेन्ट कॉर्पोरेशन (Tata Investment Corp): 3.9% की गिरावट।

  • टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स (Tata Motors PV): 2.6% नीचे आया।

  • टाटा पावर और टाटा एक्सी (Tata Power & Elxsi): क्रमश: 1.4% और 1.09% गिरे।

  • TCS और टाटा स्टील: मामूली दबाव के साथ लाल निशान में कारोबार करते दिखे।

टाटा संस की संभावित पब्लिक लिस्टिंग (IPO) और चेयरमैन पद को लेकर चल रही इस अंदरूनी खींचतान ने निवेशकों के बीच चिंता बढ़ा दी है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक आगामी एजीएम में स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक समूह के शेयरों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।