क्रेडिट कार्ड यूजर्स सावधान: सिर्फ 46 पैसे बकाया रहने पर ग्राहक को लगा ₹1200 का चूना; जानें क्या कहते हैं RBI के नियम
कम भुगतान पर ब्याज और लेट फीस का गणित; सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस के बीच समझें क्रेडिट कार्ड बिलिंग की शर्तें
नई दिल्ली (भदैनी मिरर न्यूज़): यदि आप भी क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद काम की है। प्राइवेट सेक्टर के एचडीएफसी (HDFC) बैंक के क्रेडिट कार्ड से जुड़े एक मामले ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। एक क्रेडिट कार्ड यूजर ने दावा किया है कि उसने अपने कुल ₹10,649.46 के बिल में से ₹10,649 का भुगतान कर दिया था। हालांकि, महज 46 पैसे बकाया रह जाने के कारण बैंक ने उसके अगले स्टेटमेंट में ₹1,200 से अधिक का अतिरिक्त शुल्क और ब्याज जोड़ दिया।
इस घटना के सामने आने के बाद क्रेडिट कार्ड जारीकर्ता बैंकों के कड़े नियमों और छोटे बकाये पर लगने वाले भारी-भरकम शुल्कों पर सवाल खड़े हो गए हैं।
बकाया राशि और लेट फीस पर क्या हैं RBI के नियम?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशा-निर्देशों के अनुसार क्रेडिट कार्ड बिलिंग और लेट पेमेंट चार्ज को लेकर नियम स्पष्ट हैं:
-
ब्याज-मुक्त अवधि (Interest-Free Period): यदि ग्राहक तय तिथि (Due Date) तक कुल बिल राशि का पूरा भुगतान नहीं करता है, तो उसकी ब्याज-मुक्त क्रेडिट अवधि समाप्त हो जाती है। इसके बाद बकाया राशि पर नियमनुसार ब्याज लगाया जा सकता है।
-
ब्याज की गणना: आरबीआई का नियम कहता है कि ब्याज केवल उस बकाया रकम पर ही लगाया जाना चाहिए जो जमा नहीं की गई है, न कि पूरे मूल बिल राशि पर।
-
3 दिनों की मोहलत (Grace Period): बैंक किसी खाते को तब तक 'पास्ट ड्यू' (Past Due) घोषित नहीं कर सकते या लेट-पेमेंट फीस जैसी पेनल्टी नहीं लगा सकते, जब तक कि अकाउंट तय तारीख के बाद कम से कम तीन दिनों तक बकाया में न रहे।
-
पारदर्शिता: कार्ड जारीकर्ता बैंकों को बिलिंग स्टेटमेंट में स्पष्ट रूप से बताना अनिवार्य है कि कितनी न्यूनतम बकाया राशि न चुकाने पर फ्री-क्रेडिट पीरियड खत्म हो जाएगा।
क्या कुछ पैसों की कमी पर तुरंत पेनल्टी लग सकती है?
वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकांश क्रेडिट कार्ड प्रणालियां (Systems) पेमेंट में बेहद मामूली अंतर (जैसे कुछ पैसे या कुछ रुपये) को 'आंशिक भुगतान' (Partial Payment) की श्रेणी में नहीं मानती हैं।
नोवियो (Novio) के फाउंडर एवं सीईओ आदित्य गुप्ता के मुताबिक, आम तौर पर बहुत छोटे अंतर पर सिस्टम अपने आप राहत दे देता है और उस पर लेट फीस नहीं लगाई जाती। हालांकि, प्रत्येक बैंक का सॉफ्टवेयर और नियम थोड़े भिन्न हो सकते हैं, जिसकी सटीक सीमा अलग-अलग बैंकों की पॉलिसी पर निर्भर करती है।
अचानक बड़ा बिल आ जाए तो क्या करें ग्राहक?
यदि आपके क्रेडिट कार्ड बिल में अचानक कोई अप्रत्याशित या भारी-भरकम चार्ज जुड़कर आता है, तो घबराने की जगह तुरंत निम्नलिखित कदम उठाएं:
-
बिल ब्रेकअप देखें: स्टेटमेंट में चेक करें कि लगाई गई रकम में मूल ब्याज कितना है, लेट पेमेंट फीस कितनी है और उस पर कितना जीएसटी (GST) लगा है।
-
बैंक कस्टमर केयर से संपर्क करें: यदि बकाया रकम बेहद मामूली (जैसे 46 पैसे या 1-2 रुपये) थी, तो बैंक के कस्टमर केयर या नोडल अधिकारी से संपर्क कर चार्ज वेव-ऑफ (माफ) करने का अनुरोध करें।
-
आरबीआई ओम्बड्समैन (Lokpal): यदि बैंक आपकी जायज शिकायत का निवारण नहीं करता है, तो आप आरबीआई के बैंकिंग लोकपाल पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।