Business News: डॉलर के मुकाबले 100 के करीब पहुंचा भारतीय रुपया! जानिए वो 3 बड़े कारण जिससे लगातार कमजोर हो रही है हमारी करेंसी
Indian Rupee Fall: साल 2026 के शुरुआती 5 महीनों में ही 7.5% टूटा रुपया, विदेशी निवेशकों ने बाजार से निकाले 23 अरब डॉलर; आम जनता पर पड़ेगा गंभीर असर।
नई दिल्ली/वाराणसी (भदैनी मिरर): किसी भी देश की मुद्रा (Currency) की मजबूती या कमजोरी सीधे तौर पर वहां की अर्थव्यवस्था की सेहत का आईना होती है। आमतौर पर माना जाता है कि जिस देश की जीडीपी रफ्तार पकड़ रही हो, उसकी करेंसी मजबूत होनी चाहिए। हालांकि, भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में यह नियम बेअसर साबित हो रहा है। तेज आर्थिक वृद्धि दर के बावजूद साल 2018 से भारतीय रुपया लगातार कमजोर हो रहा है और अब साल 2026 में यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 97 के बेहद करीब पहुंच चुका है।
मौजूदा साल 2026 के अभी शुरुआती पांच महीने भी पूरे नहीं हुए हैं और रुपया अमेरिकी डॉलर की तुलना में रिकॉर्ड $7.5\%$ तक गिर चुका है। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि यही स्थिति रही, तो रुपया जल्द ही $100$ के उस मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर जाएगा, जिसे कभी अकल्पनीय माना जाता था।
रुपये की ऐतिहासिक गिरावट के 3 सबसे बड़े कारण
भारतीय मुद्रा को इस ऐतिहासिक गिरावट के गर्त में धकेलने के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित तीन कारण जिम्मेदार हैं:
1. ईरान युद्ध और कच्चे तेल (Crude Oil) की आसमान छूती कीमतें
भारत अपनी जरूरत का लगभग $90\%$ कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। तेल महंगा होने का सीधा मतलब है कि भारत को उतनी ही मात्रा में तेल खरीदने के लिए पहले से कहीं अधिक डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं, जिससे देश का व्यापार घाटा और चालू खाते का घाटा (CAD) लगातार बढ़ रहा है।
2. विदेशी निवेशकों (FIIs) द्वारा रिकॉर्ड पूंजी निकासी
रुपये के कमजोर होने से विदेशी निवेशकों को डॉलर में मिलने वाला रिटर्न कम हो जाता है। यही वजह है कि साल 2026 में वैश्विक निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से रिकॉर्ड 23 अरब डॉलर की भारी-भरकम पूंजी निकाल ली है। विदेशी पैसा अब भारत के बजाय उन देशों का रुख कर रहा है जिनकी मुद्राएं डॉलर के सामने मजबूती से टिकी हैं।
3. डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियां और घरेलू संरचनात्मक कमजोरियां
पिछले साल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत के खिलाफ आक्रामक टैरिफ (आयात शुल्क) की घोषणा के बाद रुपये में गिरावट तेज हुई थी। इसके अलावा अर्थशास्त्रियों का मानना है कि रुपये की इस लाचारी की असली वजह सिर्फ बाहरी संकट नहीं, बल्कि देश की घरेलू संरचनात्मक कमजोरियां भी हैं, जिन्हें आर्थिक विकास के शोर में दूर नहीं किया जा सका। यही वजह थी कि साल 2025 में भी रुपया एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा साबित हुआ था।
पूर्व RBI गवर्नर डी सुब्बाराव की चेतावनी: "अति-आत्मविश्वास में न रहे भारत"
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर डी सुब्बाराव ने इस संकट पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि रुपये की कमजोरी हालिया संकट की कहानी नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैश्विक स्तर पर तकनीक और नई तकनीक (जैसे AI, बायोटेक और डेटा सेंटर्स) की ओर पूंजी का खिंचाव है, जहां भारत की भूमिका अभी भी सीमित है।
सुब्बाराव ने चेतावनी देते हुए कहा:
"भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अभी लगभग 700 अरब डॉलर के आसपास है, जो दुनिया के सबसे बड़े भंडारों में से एक है। लेकिन हमें इसे लेकर अति-आत्मविश्वास (Overconfidence) का शिकार नहीं होना चाहिए। सामान्य दिनों में यह राशि बहुत बड़ी लग सकती है, लेकिन आर्थिक संकट के दौर में असली परीक्षा इस भंडार की साख और विश्वसनीयता की होती है।"
आम जनता और अर्थव्यवस्था पर क्या होगा इसका गंभीर असर?
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महंगाई का झटका: रुपया कमजोर होने से विदेशों से आयात होने वाली वस्तुएं जैसे- कच्चा तेल, रसोई गैस (LPG), उर्वरक (Fertilizers) और इलेक्ट्रॉनिक्स सामान महंगे हो जाएंगे।
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आयात बिल में भारी बढ़ोतरी: ब्लूमबर्ग इकनॉमिक्स के अनुसार, यदि कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार रहता है, तो भारत का आयात बिल हर महीने 5 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है।
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रेमिटेंस पर संकट: हालांकि कमजोर रुपया विदेशों में रहने वाले भारतीयों के परिवारों के लिए फायदेमंद होता है (क्योंकि डॉलर के बदले ज्यादा रुपये मिलते हैं), लेकिन ईरान युद्ध के चलते खाड़ी देशों (Persian Gulf) में काम कर रहे लाखों प्रवासियों की आजीविका और भारत आने वाले 135 अरब डॉलर के रेमिटेंस पर संकट मंडराने लगा है।
सरकार और आरबीआई के कदम अभी बेअसर:
स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने सोना और चांदी पर आयात शुल्क (Import Duty) को दोगुने से अधिक कर दिया है। इसके साथ ही आरबीआई लगातार बाजार में डॉलर बेचकर रुपये को संभालने की कोशिश कर रहा है, लेकिन फिलहाल ये सभी उपाय नाकाफी साबित हो रहे हैं।