नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी खबर: EPFO की सैलरी लिमिट दोगुनी करने की तैयारी, अब ₹25,000 वेतन वाले भी आएंगे पीएफ के दायरे में
10 साल बाद पीएफ नियमों में बड़े बदलाव की आहट, ESIC और EPFO की सैलरी लिमिट होगी एक समान? मंत्रालय में मंथन शुरू
नई दिल्ली/वाराणसी (भदैनी मिरर डेस्क): देश के करोड़ों कर्मचारियों के लिए भविष्य निधि (PF) से जुड़ी एक बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। केंद्र सरकार कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत अनिवार्य सैलरी लिमिट (Wage Limit) को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 या ₹30,000 करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। यदि यह फैसला लागू होता है, तो प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लाखों नए कर्मचारी सोशल सिक्योरिटी (सामाजिक सुरक्षा) के दायरे में आ जाएंगे।
10 साल बाद बदलाव की तैयारी
आपको बता दें कि आखिरी बार EPFO की सैलरी लिमिट में साल 2014 में बदलाव किया गया था, जब इसे ₹6,500 से बढ़ाकर ₹15,000 किया गया था। पिछले एक दशक में कर्मचारियों के वेतन में तो वृद्धि हुई है, लेकिन पीएफ की सीमा वहीं अटकी हुई है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी बढ़ती महंगाई और वेतन को देखते हुए इस लिमिट को अपडेट करने की सलाह दी है।
क्या है सरकार की योजना?
सूत्रों के अनुसार, श्रम मंत्रालय EPFO और ESIC (कर्मचारी राज्य बीमा निगम) की सैलरी लिमिट को एक समान करने की दिशा में काम कर रहा है। फिलहाल ESIC की लिमिट ₹21,000 है। सरकार का लक्ष्य है कि दोनों की सीमा को बढ़ाकर एक बराबर कर दिया जाए ताकि कंपनियों के लिए नियमों का पालन करना और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' आसान हो सके।
क्यों पड़ी लिमिट बढ़ाने की जरूरत?
सैलरी बढ़ने की वजह से बड़ी संख्या में वर्कर्स पीएफ के दायरे से बाहर हो रहे थे। सरकार चाहती है कि हर कामकाजी व्यक्ति को रिटायरमेंट के बाद सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिले। सैलरी लिमिट बढ़ने से ज्यादा कर्मचारी फॉर्मल वर्कफोर्स का हिस्सा बनेंगे और उनके रिटायरमेंट फंड में भी अच्छी-खासी बढ़ोतरी होगी।
कर्मचारियों और कंपनियों पर क्या होगा असर?
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कर्मचारियों को फायदा: जो लोग अब तक ₹15,000 से ज्यादा सैलरी होने के कारण अनिवार्य पीएफ के दायरे में नहीं थे, उनका भी पीएफ कटना शुरू होगा। इससे भविष्य के लिए बड़ा फंड जमा होगा।
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कंपनियों पर बोझ: सैलरी लिमिट बढ़ने से कंपनियों को अपने हिस्से का पीएफ योगदान अधिक देना होगा, जिससे उन पर वित्तीय बोझ बढ़ सकता है।
मंत्रालय में बातचीत जारी
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के मुताबिक, श्रम मंत्रालय ने कुछ राज्यों में बढ़ी हुई न्यूनतम मजदूरी का संज्ञान लिया है। मंत्रालय के भीतर अभी इस पर आंतरिक चर्चा चल रही है और जल्द ही संबंधित पक्षों (Stakeholders) के साथ मशविरा करने के बाद जरूरी मंजूरी ली जाएगी।