एअर इंडिया पर बढ़ा वित्तीय दबाव: ₹22,000 करोड़ के रिकॉर्ड घाटे के बाद मांगी $1.5 अरब की मदद
एअर इंडिया पर बढ़ा वित्तीय दबाव: ₹22,000 करोड़ के रिकॉर्ड घाटे के बाद मांगी $1.5 अरब की मदद
व्यापार व नागरिक उड्डयन: टाटा समूह के स्वामित्व वाली देश की प्रमुख एयरलाइन कंपनी 'एअर इंडिया' (Air India) इस समय भारी वित्तीय दबाव के दौर से गुजर रही है। अपने महत्वाकांक्षी ट्रांसफॉर्मेशन और टर्नअराउंड प्लान के बीच एयरलाइन को परिचालन जारी रखने व सुधार कार्यों के लिए भारी पूंजी की तत्काल आवश्यकता है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एअर इंडिया ने अपने शेयरधारकों—टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस—से करीब $1.5 बिलियन (लगभग ₹14,355 करोड़) की नई इक्विटी फंडिंग की मांग की है।
₹22,180 करोड़ का रिकॉर्ड संयुक्त घाटा
फंडिंग की यह मांग ऐसे समय में सामने आई है, जब मार्च में समाप्त हुए वित्त वर्ष में एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस ने संयुक्त रूप से $2.33 बिलियन (लगभग ₹22,180 करोड़) का रिकॉर्ड घाटा दर्ज किया है। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में यह नुकसान दोगुने से भी अधिक है। एअर इंडिया के इस घाटे का असर उसकी 25 फीसदी हिस्सेदार कंपनी 'सिंगापुर एयरलाइंस' के मुनाफे पर भी साफ देखा गया है।
किस्तों में आ सकती है फंडिंग, बातचीत जारी
सूत्रों के मुताबिक, एअर इंडिया को इस पूंजी की तत्काल जरूरत है, लेकिन यह निवेश एकमुश्त मिलने के बजाय चरणबद्ध (किस्तों में) तरीके से आ सकता है।
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इस निवेश प्रस्ताव पर फिलहाल बातचीत शुरुआती दौर में है और टाटा संस या सिंगापुर एयरलाइंस ने अंतिम निर्णय नहीं लिया है।
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सिंगापुर एयरलाइंस ने एक बयान में कहा कि वह टाटा संस के साथ मिलकर एअर इंडिया के ट्रांसफॉर्मेशन का समर्थन कर रही है, हालांकि वित्तीय विवरणों पर कोई टिप्पणी नहीं की गई।
कई मोर्चों पर चुनौतियों से जूझ रही एयरलाइन
वर्ष 2022 में टाटा ग्रुप द्वारा अधिग्रहण के बाद से यह एअर इंडिया की सबसे बड़ी फंडिंग डिमांड है। एयरलाइन को हाल के दिनों में कई अंतरराष्ट्रीय और तकनीकी मोर्चों पर नुकसान उठाना पड़ा है:
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एयरस्पेस पाबंदी: पाकिस्तान के एयरस्पेस प्रतिबंध और पश्चिम एशिया (ईरान) में तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय रूटों पर परिचालन लागत बढ़ी है।
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अंतरराष्ट्रीय दुर्घटनाएं व वैश्विक तनाव: पिछले वर्ष हुई विमान दुर्घटना और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के प्रभावित होने से अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा है।
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सप्लाई चेन और फ्लीट में सुधार: बोइंग और एयरबस से सैकड़ों विमानों के ऑर्डर और पुराने बेड़े के जीर्णोद्धार पर बड़ा खर्च हो रहा है।
टर्नअराउंड में लग सकते हैं 10 साल
टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन पहले ही संकेत दे चुके हैं कि एअर इंडिया को पूरी तरह पटरी पर लाने (टर्नअराउंड) में 10 साल तक का समय लग सकता है। एयरलाइन की कार्य संस्कृति, पुराने सिस्टम और फ्लीट में बदलाव के साथ-साथ खर्चों पर नियंत्रण पाने के लिए विमानों की डिलीवरी टालने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है।