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8th Pay Commission: क्या केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में होगा 400% का बंपर इजाफा? जानिए 5 फिटमेंट फैक्टर का नया फॉर्मूला

8th Pay Commission: क्या केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में होगा 400% का बंपर इजाफा? जानिए 5 फिटमेंट फैक्टर का नया फॉर्मूला

 

नई दिल्ली / भदैनी मिरर ब्यूरो:

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8th Pay Commission (आठवां वेतन आयोग) अब केवल एक नियमित सैलरी रिवीजन का जरिया नहीं रह गया है, बल्कि यह एक देशव्यापी बहस का मुद्दा बन चुका है। कर्मचारियों की मांग और सरकार की वित्तीय क्षमता के बीच संतुलन बनाने की कोशिशों के बीच एक ऐसा प्रस्ताव सामने आया है, जिसने सबका ध्यान खींचा है।

इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने वेतन आयोग के सामने एक अनूठा प्रस्ताव रखा है। अगर यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो कुछ सीनियर अधिकारियों की बेसिक सैलरी में 400 फीसदी से ज्यादा की भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

पहली बार एक नहीं, बल्कि 5 फिटमेंट फैक्टर की मांग

आमतौर पर वेतन आयोग सभी स्तर के कर्मचारियों के लिए एक ही समान (Common) फिटमेंट फैक्टर की सिफारिश करता रहा है। जैसे 7वें वेतन आयोग में इसे 2.57 तय किया गया था। लेकिन इस बार IRTSA ने इस परंपरा को बदलते हुए अलग-अलग पे-लेवल के लिए 5 अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor Formula) का सुझाव दिया है:

पे-लेवल (Pay Levels) प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर (Proposed Fitment Factor)
लेवल 1 से 5 2.92
लेवल 6 से 8 3.50
लेवल 9 से 12 3.80
लेवल 13 से 16 4.09
लेवल 17 से 18 4.38

क्या होता है फिटमेंट फैक्टर?

फिटमेंट फैक्टर वह कनवर्टर या गुणांक (Multiplier) होता है, जिससे मौजूदा बेसिक सैलरी को गुणा करके नई बेसिक सैलरी तय की जाती है। इसका सीधा फॉर्मूला है:

नई बेसिक पे = वर्तमान बेसिक पे X फिटमेंट फैक्टर

समझिए सैलरी का पूरा गणित: ₹2.5 लाख बढ़कर सीधे ₹10.95 लाख?

यदि सरकार IRTSA के इस '5 फिटमेंट फैक्टर फॉर्मूले' को स्वीकार कर लेती है, तो कर्मचारियों के वेतन में जबरदस्त उछाल आएगा:

  • सीनियर लेवल (Levels 17-18): यदि किसी वरिष्ठ अधिकारी की वर्तमान बेसिक सैलरी ₹2.5 लाख है, तो 4.38 के फिटमेंट फैक्टर के साथ उनका नया मूल वेतन बढ़कर लगभग ₹10.95 लाख हो जाएगा।

  • मिड-लेवल (Levels 6-8): मध्य स्तर के कर्मचारियों की वर्तमान ₹45,000 की बेसिक सैलरी 3.50 के फिटमेंट फैक्टर से बढ़कर सीधे ₹1.57 लाख हो जाएगी।

एसोसिएशन का तर्क: रेलवे और अन्य विभागों में जूनियर और सीनियर स्टाफ (विशेषकर तकनीकी और सुरक्षा से जुड़े पदों) के बीच सैलरी का अंतर काफी कम हो गया है। इस विसंगति को दूर करने के लिए यह स्लैब सिस्टम जरूरी है।

अन्य प्रमुख मांगें: 5% इंक्रीमेंट और DA का मर्जर

सैलरी हाइक के अलावा रेलवे तकनीकी कर्मचारियों के संगठन ने कई और बड़ी मांगें भी रखी हैं:

  • तकनीकी रेल कर्मचारियों के लिए एक अलग पे-स्ट्रक्चर तैयार किया जाए।

  • सालाना वेतन वृद्धि (Annual Increment) को 3% से बढ़ाकर 5% किया जाए।

  • वेतन संशोधन की गणना शुरू होने से पहले 50 प्रतिशत महंगाई भत्ते (DA) को बेसिक पे में मर्ज (विलीन) किया जाए।

इसके अलावा, अन्य कर्मचारी संगठनों जैसे भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ ने न्यूनतम वेतन ₹72,000 और 4.0 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है, जबकि नेशनल काउंसिल-JCM ने न्यूनतम बेसिक पे ₹69,000 करने पर जोर दिया है।

'फैमिली यूनिट' और ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) पर भी घमासान

कर्मचारी यूनियनों ने सरकार से दशकों पुराने 'फैमिली यूनिट' फॉर्मूले को 3 से बढ़ाकर 5 करने की मांग की है। उनका कहना है कि आज के दौर में महंगाई, स्वास्थ्य और शिक्षा के खर्चों के कारण एक कर्मचारी पर पत्नी और बच्चों के अलावा बुजुर्ग माता-पिता की जिम्मेदारी भी होती है।

वहीं, पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर भी दबाव बना हुआ है। हालांकि, अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, पूरी तरह से एनपीएस (NPS) को खत्म करना अब व्यावहारिक रूप से कठिन है, इसलिए यूनियन अब "OPS जैसी सुरक्षा" (जैसे- न्यूनतम एश्योर्ड पेंशन और DA से जुड़ी पेंशन सुरक्षा) की मांग पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

क्या सरकार के लिए यह वित्तीय बोझ उठाना मुमकिन है?

इस भारी-भरकम सैलरी हाइक के प्रस्ताव ने सरकार की चिंताएं बढ़ा दी हैं। खुद कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि भी निजी तौर पर मानते हैं कि सरकार पर वित्तीय दबाव (Fiscal Pressure), पेंशन देनदारियां और महंगाई का जोखिम बहुत अधिक है।

यदि केंद्र सरकार इतना ऊंचा फिटमेंट फैक्टर लागू करती है, तो इसका असर केवल सैलरी पर नहीं, बल्कि पेंशन, भत्तों और एरियर पर भी पड़ेगा। साथ ही, केंद्रीय वेतन आयोग की तर्ज पर राज्य सरकारें भी अपने कर्मचारियों का वेतन बढ़ाती हैं, जिससे देश के खजाने पर चौतरफा वित्तीय बोझ बढ़ेगा। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि सरकार बीच का रास्ता (Middle Path) निकाल सकती है।

देशव्यापी दौरों पर निकला आठवां वेतन आयोग

न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित 8वें वेतन आयोग ने अपना परामर्श चरण (Consultation Phase) तेज कर दिया है। दिल्ली के बाद अब आयोग की टीम देश के विभिन्न हिस्सों का दौरा कर रही है:

  • 6 और 7 जुलाई: भुवनेश्वर दौरा (कर्मचारी यूनियनों और पेंशनभोगी समूहों के साथ बैठक)

  • आगामी दौरे: लखनऊ, हैदराबाद, श्रीनगर, लद्दाख और जम्मू-कश्मीर।

निष्कर्ष: 3 नवंबर 2025 को गठित हुए इस 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का सीधा असर देश के 1.1 करोड़ से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर पड़ने वाला है। अब देखना यह है कि इस चुनौतीपूर्ण आर्थिक माहौल में सरकार कर्मचारियों की उम्मीदों और देश के बजट के बीच कैसा तालमेल बिठाती है।