8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले! ₹18,000 से सीधे ₹68,940 तक पहुंच सकती है बेसिक सैलरी, समझें फिटमेंट फैक्टर का पूरा गणित
बिजनेस डेस्क, भदैनी मिरर: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर चर्चाएं बेहद तेज हो गई हैं। विभिन्न कर्मचारी संगठनों की ओर से फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाने की मांग लगातार की जा रही है। यदि सरकार कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग यानी 3.83 के फिटमेंट फैक्टर को हरी झंडी दे देती है, तो केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन (Basic Pay) मौजूदा ₹18,000 से बढ़कर सीधे ₹68,940 हो सकता है। यानी सैलरी में करीब 283 प्रतिशत की बंपर वृद्धि देखने को मिल सकती है।
आखिर क्या होता है 'फिटमेंट फैक्टर'?
आसान शब्दों में कहें तो फिटमेंट फैक्टर एक गणितीय गुणक (Multiplier) होता है। इसी के आधार पर कर्मचारियों के मौजूदा बेसिक पे और पेंशन को नए सैलरी स्ट्रक्चर में बदला जाता है। वेतन आयोग की सिफारिशों में इसे सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि आपके भत्ते, एरियर और पेंशन इसी के आधार पर तय होते हैं।
7वें वेतन आयोग का इतिहास: 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था। इसके चलते कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन ₹7,000 से बढ़कर सीधे ₹18,000 हो गया था।
फिटमेंट फैक्टर के हिसाब से कितनी बढ़ सकती है सैलरी?
अलग-अलग कर्मचारी संगठनों और विशेषज्ञों ने सरकार के सामने अपनी मांगें और अनुमान रखे हैं। मौजूदा न्यूनतम बेसिक पे ₹18,000 को आधार मानकर देखें तो संभावित वेतन का गणित कुछ इस प्रकार बैठता है:
| संभावित फिटमेंट फैक्टर | मांग करने वाला संगठन/विशेषज्ञ | अनुमानित न्यूनतम बेसिक सैलरी |
| 1.92 | विशेषज्ञों का अनुमान | ₹34,560 |
| 2.57 | 7वें वेतन आयोग की तर्ज पर | ₹46,260 |
| 2.86 से 3.68 | J&K कर्मचारी समन्वय समिति | ₹51,480 से ₹66,240 |
| 3.00 | ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) | ₹54,000 |
| 3.25 | फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन | ₹58,500 |
| 3.83 | नेशनल काउंसिल-NC-JCM (सबसे बड़ी मांग) | ₹68,940 |
सिर्फ बेसिक सैलरी नहीं, भत्तों में भी आएगा बंपर उछाल
8वां वेतन आयोग लागू होने और फिटमेंट फैक्टर बढ़ने का फायदा सिर्फ मूल वेतन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा असर अन्य भत्तों पर भी पड़ेगा:
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HRA और ट्रांसपोर्ट अलाउंस: बेसिक सैलरी बढ़ते ही हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रांसपोर्ट अलाउंस में भी स्वतः बड़ी बढ़ोतरी हो जाएगी।
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DA का मर्जर: नया नियम लागू होते ही मौजूदा महंगाई भत्ता (DA) मूल वेतन में समाहित (Merge) कर दिया जाएगा और नए सैलरी स्ट्रक्चर के साथ डीए की गणना शून्य से फिर से शुरू होगी।
सरकार के फैसले पर टिकी निगाहें
वर्तमान में 1 करोड़ से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजरें पूरी तरह से सरकार के रुख पर टिकी हैं। फिटमेंट फैक्टर का ग्राफ जितना ऊंचा होगा, कर्मचारियों की जेब में उतनी ही मोटी रकम आएगी। हालांकि, इस पर अंतिम और निर्णायक फैसला केंद्रीय कैबिनेट को ही लेना है।