'कैदियों का हक नहीं मार सकते अफसर': सजा में छूट और रिहाई पर पटना हाईकोर्ट सख्त
जेल मैनुअल में पारदर्शिता, 'हिस्ट्री टिकट' देने और वेबसाइट पर आंकड़े सार्वजनिक करने के दिए कड़े निर्देश; 4 महीने का अल्टीमेटम
भदैनी मिरर डेस्क: बिहार की जेलों में बंद कैदियों की सजा में छूट और उनकी समय पूर्व रिहाई की प्रक्रिया में सुस्ती व मनमाने रवैये को लेकर पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और जेल प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जेल प्रशासन कैदियों के अधिकारों पर एकाधिकार या तानाशाही नहीं चला सकता।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर स्वतः संज्ञान (Suo Moto) लेते हुए जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस चंद्र शेखर झा की खंडपीठ ने जेल व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और प्रशासनिक लेट-लतीफी को खत्म करने के लिए कई बड़े और कड़े निर्देश दिए हैं।
कैदियों को देनी होगी 'हिस्ट्री टिकट' की कॉपी
हाईकोर्ट ने पाया कि कैदियों को अक्सर यह जानकारी ही नहीं होती कि उनकी कितनी सजा माफ की गई है या कितनी काटी गई है। अदालत ने निर्देश दिया है कि जेल प्रशासन प्रत्येक कैदी को उसकी 'हिस्ट्री टिकट' की डुप्लीकेट कॉपी अनिवार्य रूप से सौंपे, ताकि उन्हें अपनी सजा में मिली छूट का पूरा ब्योरा पता रहे।
बिना पक्ष सुने रद्द नहीं होगी सजा में छूट
अदालत ने जेल प्रशासन की मनमानी पर रोक लगाते हुए कहा कि किसी भी कैदी को पहले से मिली सजा में छूट को बिना उसका पक्ष सुने या बिना लिखित और वाजिब कारण दिए रद्द या कम नहीं किया जा सकता।
अनपढ़ और साक्षर कैदियों में न हो भेदभाव
बिहार जेल मैनुअल में पढ़े-लिखे या वोकेशनल ट्रेनिंग देने वाले कैदियों को मिलने वाली अतिरिक्त छूट पर हाईकोर्ट ने सवाल खड़े किए। पीठ ने कहा कि अनपढ़ कैदियों को भी सुधार के आधार पर समान अवसर मिलना चाहिए। इसके लिए राज्य सरकार को नई नीति तैयार करने का निर्देश दिया गया है।
फाइल दबाने वाले अफसरों पर कसगा शिकंजा
समय पूर्व रिहाई की फाइलों को महीनों तक लटकाकर रखने वाले पुलिस अधीक्षकों (SP) और प्रोबेशन अधिकारियों के लिए सख्त समय-सीमा निर्धारित की गई है। कोर्ट ने कहा कि अगर तय समय (15 से 30 दिन) के भीतर संबंधित अधिकारी अपनी रिपोर्ट जमा नहीं करते हैं, तो उस रिपोर्ट को कैदी के अनुकूल मान लिया जाएगा।
पोर्टल पर सार्वजनिक करना होगा ब्योरा
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए हाईकोर्ट ने बिहार के गृह विभाग को निर्देश दिया है कि समय पूर्व रिहाई के योग्य सभी उम्रकैदियों की सूची, उनकी कस्टडी की अवधि और सजा छूट का पूरा विवरण आधिकारिक पोर्टल पर सार्वजनिक किया जाए।
सरकार को 4 महीने का अल्टीमेटम
हाईकोर्ट ने राज्य सजा समीक्षा बोर्ड (State Sentence Review Board) के पास लंबित 32 मामलों की अद्यतन (Updated) रिपोर्ट 4 सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने को कहा है। इसके अलावा, सभी सिफारिशों को लागू कर अदालत में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के लिए बिहार सरकार को 4 महीने का अल्टीमेटम दिया गया है।