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बिहार: क्या खत्म होगी शराबबंदी? बाहुबली अनंत सिंह के बयान ने बढ़ाई सियासी हलचल

अनंत सिंह की दोटूक: "सूखा नशा ज्यादा खतरनाक, अब चालू होनी चाहिए शराब"

 

पटना: बिहार की सियासत में आज एक नए अध्याय की शुरुआत हो गई है। मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी के शपथ ग्रहण के साथ ही प्रदेश में 'सम्राट युग' का आगाज हो चुका है। उनके साथ डिप्टी सीएम के तौर पर विजय चौधरी और विजेंद्र यादव ने भी कमान संभाल ली है। लेकिन, सत्ता परिवर्तन के साथ ही प्रदेश का सबसे चर्चित मुद्दा यानी 'शराबबंदी' एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है।

"शराब चालू होनी चाहिए": अनंत सिंह की दोटूक मांग

मोकामा के बाहुबली पूर्व विधायक अनंत सिंह ने नई सरकार के गठन के साथ ही बड़ा बम फोड़ा है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह शराबबंदी के मुद्दे पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से बात करेंगे। अनंत सिंह का तर्क है कि शराब पर प्रतिबंध के कारण बिहार में 'सूखा नशा' (नशीले पाउडर और अन्य पदार्थ) का चलन बढ़ गया है, जो युवाओं के लिए शराब से भी ज्यादा घातक साबित हो रहा है।

उन्होंने कहा, "बिहार में शराब फिर से चालू होनी चाहिए। अभी जो नशा चल रहा है, वह बहुत खतरनाक है। हम मुख्यमंत्री से मिलकर इस कानून पर पुनर्विचार करने की मांग करेंगे।"

निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री पर क्या बोले?

नीतीश कुमार के राजनीति से दूरी बनाए रखने वाले बेटे निशांत कुमार को लेकर भी अनंत सिंह ने अपनी राय रखी। उन्होंने वकालत की कि निशांत को नई सरकार का हिस्सा बनना चाहिए। जब उनसे पूछा गया कि निशांत खुद राजनीति में नहीं आना चाहते, तो अनंत सिंह ने चिरपरिचित अंदाज में कहा— "वह अभी बच्चा है, उसे समझा लिया जाएगा। वह सरकार में जरूर आएगा।"

नीतीश कुमार रहेंगे 'मार्गदर्शक'

सत्ता हस्तांतरण और नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री न रहने के सवाल पर अनंत सिंह ने नरम रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार का आशीर्वाद सरकार पर बना रहेगा। भले ही सम्राट चौधरी कमान संभाल रहे हों, लेकिन नीतीश कुमार ही 'मालिक' रहेंगे और भविष्य के चुनाव व निर्णय उन्हीं के मार्गदर्शन में लिए जाएंगे।

JDU का स्टैंड अब भी सख्त

एक तरफ जहाँ अनंत सिंह जैसे नेता शराबबंदी हटाने की वकालत कर रहे हैं, वहीं जदयू (JDU) के शीर्ष नेतृत्व ने अब भी संकेत दिए हैं कि वह शराबबंदी कानून में किसी भी बड़े बदलाव के पक्ष में नहीं है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अपने इस कार्यकाल में इस विवादास्पद और संवेदनशील मुद्दे को कैसे संभालते हैं।