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Bihar News: भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में आरोपी तत्कालीन SDPO राजेश शर्मा को मिली नई पोस्टिंग

भोजपुर के चर्चित कथित एनकाउंटर केस में FIR दर्ज होने के बाद मद्य निषेध विभाग में तैनात किए गए राजेश कुमार शर्मा; निष्पक्ष जांच पर अड़ा परिवार।

 

पटना/भोजपुर। बिहार के भोजपुर जिले का बहुचर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस कथित एनकाउंटर मामले में आरोपी बनाए गए तत्कालीन जगदीशपुर SDPO (अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी) राजेश कुमार शर्मा को बिहार सरकार ने नई पोस्टिंग दे दी है। घटना के बाद बढ़ते विवाद और चौतरफा दबाव के बीच पहले उन्हें पद से हटाकर पुलिस मुख्यालय से अटैच किया गया था, लेकिन अब गृह विभाग की नई अधिसूचना के तहत उनकी तैनाती मद्य निषेध विभाग में कर दी गई है।

क्या है पूरा मामला?

भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बेलौटी गांव के रहने वाले भरत भूषण तिवारी की बीती 17 जून को एक पुलिस मुठभेड़ के दौरान मौत हो गई थी। पुलिस के मुताबिक, शाहपुर के बेलौटी गांव में छापेमारी के दौरान यह कार्रवाई हुई थी। घटना के बाद गंभीर रूप से घायल भरत तिवारी को अस्पताल ले जाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद से ही इलाके में भारी आक्रोश है और तत्कालीन SDPO राजेश कुमार शर्मा सहित अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है।

पुलिस का दावा: आत्मरक्षा में चलाई गई गोली

इस मामले को लेकर भोजपुर पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में पुलिसिया कार्रवाई का बचाव किया गया था। पुलिस का दावा है कि:

"टीम ने अपनी और वहां मौजूद आम लोगों की सुरक्षा को खतरे में देखते हुए आत्मरक्षा (Self-Defense) में गोली चलाई थी। पुलिस के अनुसार, गोली भरत भूषण तिवारी के पैर में लगी थी और यह कदम कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया था।"

मुआवजा नहीं, सिर्फ इंसाफ चाहिए: पीड़ित परिवार

दूसरी तरफ, मृतक भरत भूषण तिवारी के परिजनों ने पुलिस के इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक सोची-समझी साजिश और फर्जी एनकाउंटर करार दिया है। परिजनों का साफ कहना है कि उन्हें सरकार या किसी दल से कोई आर्थिक पैकेज, मुआवजा या राजनीतिक आश्वासन नहीं चाहिए।

उनकी एकमात्र मांग यह है कि इस पूरे मामले की किसी स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जाए। परिवार का मानना है कि यदि मामले की बिना किसी प्रशासनिक दबाव के स्वतंत्र जांच होगी, तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा और दोषी अधिकारियों को सजा मिल सकेगी।

प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज

एक तरफ जहां पीड़ित परिवार मामले में कानूनी कार्रवाई और निष्पक्षता की गुहार लगा रहा है, वहीं दूसरी तरफ एफआईआर के आरोपी अधिकारी राजेश कुमार शर्मा को मद्य निषेध विभाग में नई जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद बिहार के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।